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कागजों में बना 95 हजार का सोखता गड्ढा! जमीन पर झाड़ियां, जियो-टैग फोटो पर उठे सवाल..!

कागजों में बना 95 हजार का सोखता गड्ढा! जमीन पर झाड़ियां, जियो-टैग फोटो पर उठे सवाल!
छिंदवाड़ा/जुन्नारदेव। जनपद पंचायत जुन्नारदेव की ग्राम पंचायत नीलाखापा (एलजीडी कोड-135594) में सरकारी निर्माण कार्यों में कथित अनियमितता का मामला सामने आया है। आरोप है कि 15वें वित्त आयोग के तहत स्वीकृत सामुदायिक सोखता गड्ढा निर्माण के नाम पर लगभग पूरी राशि निकाल ली गई, जबकि मौके पर निर्माण कार्य का कोई स्पष्ट अस्तित्व दिखाई नहीं देता। इस मामले में पंचायत द्वारा अपलोड की गई जियो-टैग फोटो पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार एक्टिव आईडी-102380540 के तहत सामुदायिक सोखता गड्ढा निर्माण के लिए 95 हजार रुपये की स्वीकृति दी गई थी। पंचायत दर्पण के रिकॉर्ड में इस कार्य के लिए 94,840 रुपये का भुगतान दर्शाया गया है तथा कार्य को पूर्ण बताया गया है।


धरातल पर नहीं मिला निर्माण का स्पष्ट प्रमाण
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिस स्थान पर सोखता गड्ढा बनाया जाना बताया गया है, वहां आज भी केवल झाड़ियां और खाली जमीन दिखाई देती है। ग्रामीणों का कहना है कि करीब दो वर्ष बीत जाने के बावजूद वहां किसी प्रकार की उपयोगी संरचना नजर नहीं आती। ऐसे में सरकारी रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति के बीच भारी अंतर होने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
जियो-टैग फोटो पर भी उठे सवाल
ग्रामीणों का दावा है कि पंचायत द्वारा पोर्टल पर अपलोड की गई जियो-टैग फोटो भी कथित रूप से निर्माण कार्य को प्रमाणित नहीं करती। उनका आरोप है कि बिना वास्तविक निर्माण के कार्य पूर्ण दर्शाकर भुगतान प्राप्त किया गया। हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि सक्षम जांच के बाद ही हो सकेगी।
निष्पक्ष जांच की मांग
ग्रामीणों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने, कार्य का भौतिक सत्यापन कराने तथा यदि रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति में अंतर पाया जाता है तो जिम्मेदार अधिकारियों एवं संबंधित लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह सरकारी धन के दुरुपयोग का गंभीर मामला हो सकता है।
अधिकारियों का पक्ष शेष
इस संबंध में ग्राम पंचायत या संबंधित विभागीय अधिकारियों का पक्ष समाचार लिखे जाने तक प्राप्त नहीं हो सका। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा। प्रशासनिक जांच के बाद ही आरोपों की आधिकारिक पुष्टि हो सकेगी।