Home NATIONAL 25 साल से पढ़ा रहे गुरुजी को नहीं मालूम “प्रसाधन” का अर्थ!शौचालय...

25 साल से पढ़ा रहे गुरुजी को नहीं मालूम “प्रसाधन” का अर्थ!शौचालय को बताया “सहयोग”, शिक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

25 साल से पढ़ा रहे गुरुजी को नहीं मालूम “प्रसाधन” का अर्थ!
शौचालय को बताया “सहयोग”, शिक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
भवन विहीन स्कूल ई-पंचायत भवन में संचालित, 30 बच्चों का भविष्य दांव पर

डिंडौरी। मध्यप्रदेश सरकार सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर सुविधाओं के लाख दावे कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। डिंडौरी जिले की शासकीय प्राथमिक शाला खाल्ले दर्री में शिक्षा व्यवस्था की पोल उस समय खुल गई, जब वर्ष 2001 से पदस्थ एक शिक्षक को “प्रसाधन” शब्द का अर्थ तक नहीं मालूम निकला।
जानकारी के अनुसार स्कूल का भवन डिस्मेंटल होने के बाद पिछले काफी समय से विद्यालय का संचालन ई-पंचायत भवन में किया जा रहा है। यहां करीब 30 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। बच्चों के लिए मूलभूत सुविधाओं की जानकारी लेने पहुंचे लोगों ने जब प्राथमिक शिक्षक लखन लाल यादव से स्कूल में प्रसाधन (शौचालय) की व्यवस्था के संबंध में सवाल किया, तो शिक्षक ने “प्रसाधन” का अर्थ ही नहीं समझा और उसका मतलब “सहयोग” बता दिया।


शिक्षक का यह जवाब सामने आते ही क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जो शिक्षक करीब 25 वर्षों से शिक्षा विभाग में सेवाएं दे रहा हो और उसे सामान्य हिंदी शब्द का अर्थ भी स्पष्ट न हो, वह बच्चों को किस गुणवत्ता की शिक्षा दे रहा होगा?
भवन नहीं, सुविधाएं नहीं, फिर कैसे बनेगा भविष्य?
एक ओर स्कूल का अपना भवन नहीं है और बच्चों को ई-पंचायत भवन में बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है, वहीं दूसरी ओर शिक्षकों की शैक्षणिक दक्षता पर भी प्रश्नचिन्ह लग रहे हैं। शिक्षा के मंदिर की यह स्थिति सरकारी दावों और धरातल की वास्तविकता के बीच का बड़ा अंतर उजागर करती है।
शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि शिक्षकों के ज्ञान का स्तर ऐसा है तो ग्रामीण अंचलों के बच्चों का भविष्य भगवान भरोसे ही है। विभाग नियमित रूप से शिक्षकों का मूल्यांकन और प्रशिक्षण कराने के दावे करता है, लेकिन इस घटना ने उन दावों की भी पोल खोल दी है।
अब जवाब किसके पास?
यह मामला केवल एक शिक्षक की जानकारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सरकारी शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता, निगरानी और जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। अब देखना होगा कि जिला शिक्षा विभाग इस पूरे मामले को गंभीरता से लेकर जांच करता है या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।

25 साल से नौकरी, फिर भी नहीं जानते “प्रसाधन” का मतलब!
गुरुजी ने शौचालय को बताया “सहयोग”, शिक्षा व्यवस्था हुई शर्मसार
ई-पंचायत भवन में चल रही स्कूल, शिक्षक के जवाब ने खोली शिक्षा विभाग की पोल
बच्चों को क्या पढ़ाएंगे गुरुजी, जब खुद नहीं जानते सामान्य हिंदी शब्द का अर्थ?