मोहखेड़ विकासखंड के निजी स्कूलों में शिक्षा के नाम पर गोरखधंधा!
सुविधाओं की अनदेखी, मान्यता के नियमों को ताक पर रखकर संचालित हो रहे कई निजी विद्यालय
छिंदवाड़ा (मोहखेड़) छिंदवाड़ा जिले के मोहखेड़ विकासखंड में निजी स्कूलों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन शिक्षा की गुणवत्ता और बुनियादी सुविधाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि कई निजी विद्यालय शासन द्वारा निर्धारित मानकों को पूरा किए बिना ही संचालित किए जा रहे हैं, जबकि शिक्षा विभाग की निगरानी भी केवल कागजों तक सीमित दिखाई दे रही है।
जानकारी के अनुसार राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा निजी विद्यालयों की मान्यता के लिए खेल मैदान, पुस्तकालय, प्रयोगशाला, शुद्ध पेयजल, विद्युत व्यवस्था तथा पृथक शौचालय जैसी सुविधाएं अनिवार्य की गई हैं। इसके बावजूद विकासखंड के कई विद्यालय ऐसे भवनों में संचालित हो रहे हैं जहां इन मूलभूत सुविधाओं का अभाव है।
दुकानों और छोटे कमरों में संचालित स्कूल
क्षेत्र में कई विद्यालय सीमित जगह और छोटे-छोटे कमरों में संचालित हो रहे हैं। कहीं खेल मैदान नहीं है तो कहीं प्रयोगशाला और पुस्तकालय की व्यवस्था नहीं है। इसके बावजूद इन विद्यालयों में विद्यार्थियों से मोटी फीस वसूली जा रही है। अभिभावकों का कहना है कि बच्चों के बेहतर भविष्य और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के नाम पर उन्हें आकर्षक विज्ञापनों के माध्यम से लुभाया जाता है।
शिक्षकों का भी हो रहा शोषण
सूत्रों के अनुसार कई निजी विद्यालयों में शिक्षकों को निर्धारित मानदेय से काफी कम वेतन दिया जा रहा है। शिक्षकों से अधिक कार्य लिया जाता है, जबकि वेतन सीमित रहता है। ऐसे में शिक्षा की गुणवत्ता पर भी असर पड़ना स्वाभाविक माना जा रहा है।
नोडल अधिकारियों की भूमिका पर सवाल
निजी विद्यालयों की निगरानी और निरीक्षण के लिए शिक्षा विभाग द्वारा नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की जाती है। लेकिन क्षेत्र में संचालित कई विद्यालयों की स्थिति देखकर सवाल उठ रहे हैं कि निरीक्षण प्रक्रिया कितनी प्रभावी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नियमों के उल्लंघन के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से विद्यालय संचालकों के हौसले बुलंद हैं। इन स्कूलों की जांच कभी विकासखंड में बैठे बीआरसी एवं जिले में बैठे डी पी सी महोदय कभी नहीं करते जिसके कारण आज प्राइवेट स्कूल संचालकों के हौसले बुलंद है!
अभिभावकों ने की जांच की मांग
क्षेत्र के अभिभावकों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि निजी विद्यालयों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और जिन स्कूलों में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं या जो मान्यता के नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
प्रश्न यह है कि जब नियम स्पष्ट हैं, तो फिर बिना पर्याप्त सुविधाओं वाले विद्यालयों को मान्यता कैसे मिल रही है? और बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ कब तक चलता रहेगा?








