सीएमओ को ही लेना पड़ा सीएम हेल्पलाइन का सहारा, लखनादौन में दूषित पेयजल आपूर्ति पर उठे सवाल
सिवनी/लखनादौन | लखनादौन नगर परिषद की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि नगर परिषद की तत्कालीन मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) को ही अपने क्षेत्र में दूषित पेयजल की समस्या के समाधान के लिए मुख्यमंत्री हेल्पलाइन का सहारा लेना पड़ा।
जानकारी के अनुसार लखनादौन नगर परिषद के वार्ड क्रमांक 4 में रहने वाली तत्कालीन सीएमओ गीता वाल्मीकि, जो वर्तमान में छपारा नगर परिषद में पदस्थ हैं, लंबे समय से अपने निवास पर दूषित पानी की आपूर्ति से परेशान थीं। बताया जाता है कि उन्होंने संबंधित अधिकारियों को मौखिक रूप से समस्या से अवगत कराया, लेकिन समाधान नहीं होने पर मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई।

मामले के सामने आने के बाद नगर परिषद की शिकायत निवारण व्यवस्था और पेयजल प्रबंधन पर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि वार्ड में दूषित पानी की समस्या लंबे समय से बनी हुई है, जिससे रहवासियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि नगर परिषद की पूर्व सीएमओ को ही अपनी मूलभूत समस्या के समाधान के लिए मुख्यमंत्री हेल्पलाइन का सहारा लेना पड़ रहा है, तो आम नागरिकों की शिकायतों का निराकरण किस प्रकार किया जाता होगा।

यह स्थिति स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है।
अब निगाहें जिला प्रशासन और नगर परिषद की कार्रवाई पर टिकी हैं। लोगों को उम्मीद है कि शिकायत के बाद न केवल वार्ड क्रमांक 4 में दूषित पेयजल की समस्या का स्थायी समाधान होगा, बल्कि नगर परिषद की शिकायत निवारण व्यवस्था में भी सुधार देखने को मिलेगा।
मुख्य बिंदु
वार्ड क्रमांक 4 में दूषित पानी की आपूर्ति का मामला।
तत्कालीन सीएमओ गीता वाल्मीकि ने की शिकायत।
अधिकारियों को सूचना देने के बाद भी नहीं हुआ समाधान।
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में दर्ज करानी पड़ी शिकायत।
नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल।








