घोरावाडी पंचायत में रिश्तों का ‘राज’ या नियमों का उल्लंघन? पंचायत दर्पण के दस्तावेजों ने खड़े किए सवाल
चौरई/छिंदवाड़ा। विकासखंड चौरई की ग्राम पंचायत घोरावाडी एक बार फिर सवालों के घेरे में है। पंचायत दर्पण पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। आरोप है कि पंचायत में महिला सरपंच, रोजगार सहायक पुत्र और विकास कार्यों में सक्रिय सरपंच पति की भूमिका ने हितों के टकराव (Conflict of Interest) की स्थिति पैदा कर दी है।

पंचायत दर्पण पर दर्ज भुगतान संबंधी जानकारी के आधार पर यह दावा किया जा रहा है कि पंचायत के विभिन्न कार्यों में सरपंच पति अल्प सिंह सनोडिया एंव सनोडिया मटेरियल सप्लायर एंव मोनू सनोडिया के नाम से भुगतान दर्शाया गया है। यदि यह तथ्य सही पाए जाते हैं, तो पंचायत की कार्यप्रणाली और वित्तीय पारदर्शिता को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं।


ग्रामीणों का कहना है कि जब पंचायत की निर्वाचित प्रतिनिधि उनकी पत्नी सरपंच है, पुत्र रोजगार सहायक के पद पर कार्यरत हो और उसी परिवार से जुड़े व्यक्ति को पंचायत कार्यों में भुगतान हो रहा हो, तो निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। लोगों का आरोप है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि सभी भुगतान और कार्य नियमानुसार हुए हैं या नहीं।
उठ रहे हैं ये बड़े सवाल

क्या पंचायत से जुड़े कार्यों में सरपंच परिवार के सदस्य लाभार्थी बन सकते हैं?
क्या भुगतान प्रक्रिया में सभी नियमों और प्रावधानों का पालन किया गया?
क्या संबंधित अधिकारियों ने भुगतान से पहले आवश्यक जांच-पड़ताल की?
यदि हितों के टकराव की स्थिति है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?

ग्रामीणों ने की जांच की मांग
स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन, जनपद पंचायत और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग से मामले की जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत दर्पण में उपलब्ध दस्तावेजों और भुगतान विवरण की बारीकी से जांच कर सच्चाई जनता के सामने लाई जाए।
प्रशासन की चुप्पी पर भी सवाल!
मामले को लेकर अभी तक संबंधित अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में लोगों की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इन आरोपों की जांच कर स्थिति स्पष्ट करता है या नहीं।
नोट: यह समाचार पंचायत दर्पण पोर्टल पर उपलब्ध कथित भुगतान विवरणों एवं स्थानीय स्तर पर लगाए जा रहे आरोपों के आधार पर तैयार किया गया है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि एवं संबंधित पक्ष का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होना शेष है। जांच के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता है।








