खाद संकट और कथित हेराफेरी पर नकुलनाथ ने उठाए सवाल
कहा- खाद लेने के नियम सिर्फ किसानों के लिए, गोदामों से खाद गायब होना गंभीर मामला
छिंदवाड़ा। जिले के पूर्व सांसद Nakul Nath ने जिले में खाद की उपलब्धता, कथित हेराफेरी और किसानों को हो रही परेशानियों को लेकर सरकार एवं प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने खाद वितरण के नियम-कानून केवल किसानों के लिए बनाए हैं, जबकि दूसरी ओर नियमों के विपरीत खाद का विक्रय और गोदामों से खाद गायब होने जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं।
पूर्व सांसद ने कहा कि पहले खाद की कालाबाजारी की शिकायतें मिलती थीं, लेकिन अब खाद के गोदामों से ही खाद गायब होने के मामले सामने आने लगे हैं। उन्होंने कहा कि कई किसान नकद राशि लेकर खाद खरीदने के लिए समितियों और दुकानों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध नहीं हो पा रही है। वहीं कुछ किसानों को खुले बाजार से अधिक कीमत पर खाद खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
नकुलनाथ ने कहा कि ऐसे किसान, जो ठेके पर भूमि लेकर खेती करते हैं, उनके लिए खाद प्राप्त करने की प्रक्रिया और अधिक जटिल साबित हो रही है। विभिन्न दस्तावेजी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद भी किसानों को खाद के लिए भटकना पड़ रहा है।
उन्होंने खाद की कीमतों में हुई वृद्धि का उल्लेख करते हुए कहा कि हाल ही में विभिन्न उर्वरकों के दामों में बढ़ोतरी से किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा है। उनके अनुसार पोटाश और एनपीके खाद के दामों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे खेती की लागत बढ़ गई है।
पूर्व सांसद ने आरोप लगाया कि छिंदवाड़ा और पांढुर्णा जिले में किसान खाद के लिए कतारों में खड़े होने को मजबूर हैं, जबकि दूसरी ओर समितियों से खाद गायब होने और नियमों के विरुद्ध विक्रय के मामले सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिला मुख्यालय के अलावा मेघदौन और चांद क्षेत्र की समितियों से लाखों रुपये मूल्य की खाद गायब होने तथा अनियमित बिक्री की शिकायतें गंभीर जांच का विषय हैं।
नकुलनाथ ने कहा कि यदि इतने गंभीर मामलों में भी कार्रवाई नहीं होती है तो इससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने मांग की कि खाद वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए तथा कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि किसानों के हितों की अनदेखी करने वाली सरकार को किसान समय आने पर जवाब देंगे।








