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जनजातीय कार्य विभाग के जिला मुख्यालय में जमे अधीक्षक, स्थानांतरण नीति पर उठे सवाल…

जनजातीय कार्य विभाग में जमे अधीक्षक, स्थानांतरण नीति पर उठे सवाल
छिंदवाड़ा। जनजातीय कार्य विभाग के अंतर्गत संचालित छात्रावासों एवं आश्रम शालाओं में वर्षों से एक ही स्थान पर पदस्थ अधीक्षकों को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार कई अधीक्षक 5 से 10 वर्षों से एक ही छात्रावास अथवा आश्रम शाला में पदस्थ हैं, जबकि शासन के स्थानांतरण संबंधी निर्देशों के अनुसार निर्धारित अवधि के बाद उनका स्थानांतरण किया जाना चाहिए।
आरोप है कि जिला मुख्यालय स्थित कुछ छात्रावासों में ऐसे अधीक्षक भी पदस्थ हैं जिन पर पूर्व में वित्तीय अनियमितता, लापरवाही अथवा अन्य मामलों में कार्रवाई हुई थी और कुछ मामलों में निलंबन तक की स्थिति बनी थी। इसके बावजूद वे आज भी प्रभावशाली पदस्थापन का लाभ उठा रहे हैं।
विभाग के भीतर यह भी चर्चा है कि सहायक आयुक्त कार्यालय की मेहरबानी से कई अधीक्षक वर्षों से जिला मुख्यालय नहीं छोड़ रहे हैं। विशेष रूप से कन्या छात्रावासों में लंबे समय से एक ही अधीक्षक के पदस्थ रहने से पारदर्शिता और प्रशासनिक निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं।
स्थानीय लोगों एवं जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यदि शासन की स्थानांतरण नीति का पालन किया जाए तो नए अधिकारियों को भी अवसर मिलेगा तथा छात्रावासों के संचालन में पारदर्शिता बढ़ेगी। नया शिक्षा सत्र प्रारंभ होने वाला है, ऐसे में विभाग से अपेक्षा की जा रही है कि छात्रावासों एवं आश्रम शालाओं में पदस्थ अधीक्षकों की समीक्षा कर आवश्यक प्रशासनिक कदम उठाए जाएं।
हालांकि, इन आरोपों पर विभाग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि विभाग अपना पक्ष देता है तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा..

(नोट: समाचार में उल्लिखित आरोप विभिन्न स्रोतों से प्राप्त जानकारी एवं स्थानीय स्तर पर उठाई जा रही मांगों पर आधारित हैं। आरोपों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित विभाग अथवा सक्षम प्राधिकारी द्वारा किया जाना शेष है।)