Godrej Agrovet Limited ने लॉन्च किए ‘अशिटाका’ और ‘टकाई’, छिंदवाड़ा में 1000 से अधिक किसान हुए शामिल
छिंदवाड़ा,। मक्का बुवाई सीजन की शुरुआत के बीच किसानों को खरपतवार और कीट नियंत्रण के बेहतर समाधान उपलब्ध कराने के उद्देश्य से godrejagrovet.com� ने दो नए क्रॉप केयर उत्पाद ‘अशिटाका’ और ‘टकाई’ लॉन्च किए। कंपनी के अनुसार ये उत्पाद विशेष रूप से मध्य प्रदेश के मक्का उत्पादक किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किए गए हैं।
कंपनी ने बताया कि इन उत्पादों को जापान की कृषि तकनीक कंपनी ISK Biosciences के सहयोग से तैयार किया गया है। लॉन्च कार्यक्रम छिंदवाड़ा में आयोजित किया गया, जिसमें 1000 से अधिक किसानों ने भाग लिया।
खरपतवार और फॉल आर्मीवॉर्म नियंत्रण पर फोकस
कंपनी के मुताबिक ‘अशिटाका’ एक खरपतवार नाशक (Herbicide) है, जो मक्का फसल में घास और चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों को नियंत्रित करने में उपयोगी है। वहीं ‘टकाई’ एक कीटनाशक (Insecticide) है, जिसे विशेष रूप से मक्का में फॉल आर्मीवॉर्म कीट के नियंत्रण के लिए विकसित किया गया है।
जानकारी के अनुसार, व्यावसायिक लॉन्च से पहले कंपनी ने क्षेत्र में 2500 से अधिक फील्ड डेमो आयोजित किए और किसानों से फीडबैक प्राप्त किया। कार्यक्रम में आईएसके जापान के वरिष्ठ प्रतिनिधि भी शामिल हुए।
कंपनी अधिकारियों ने क्या कहा
गोदरेज एग्रोवेट के क्रॉप केयर बिजनेस के सीईओ एन.के. राजावेलु ने कहा कि कंपनी का उद्देश्य किसानों को रिसर्च आधारित और भरोसेमंद फसल सुरक्षा समाधान उपलब्ध कराना है। उनके अनुसार, इन उत्पादों के माध्यम से किसानों को खरपतवार और कीट नियंत्रण में मदद मिलेगी, जिससे उत्पादकता और फसल की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है।
वहीं कंपनी के जीएम–मार्केटिंग अनिल चौबे ने बताया कि आने वाले महीनों में अतिरिक्त 2500 डेमो आयोजित किए जाएंगे, ताकि किसान उत्पादों का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त कर सकें। उन्होंने कहा कि कंपनी का वितरण नेटवर्क 150 से अधिक चैनल पार्टनर्स और 3000 से ज्यादा रिटेल आउटलेट्स तक फैला हुआ है।
मक्का उत्पादन से जुड़ी चुनौती
कृषि क्षेत्र से जुड़े आंकड़ों के अनुसार मध्य प्रदेश देश के प्रमुख मक्का उत्पादक राज्यों में शामिल है, जहां 15 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में मक्का की खेती होती है। हालांकि शुरुआती चरण में खरपतवार और फॉल आर्मीवॉर्म जैसे कीट उत्पादन को प्रभावित करते हैं, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
कंपनी का दावा है कि ‘अशिटाका’ और ‘टकाई’ का संयुक्त उपयोग फसल चक्र के दौरान खरपतवार और कीट दोनों समस्याओं के समाधान में सहायक हो सकता है।








