सीएम हेल्पलाइन शिकायतों के निराकरण पर उठे सवाल, शिकायतकर्ताओं ने जताई नाराजगी
छिंदवाड़ा। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा संचालित सीएम हेल्पलाइन योजना का उद्देश्य आम नागरिकों की समस्याओं का त्वरित एवं प्रभावी निराकरण सुनिश्चित करना है, लेकिन जिले के जनजाति कार्य विभाग एवं जिला जन शिक्षा केंद्र की कार्यप्रणाली को लेकर कुछ शिकायतकर्ताओं ने नाराजगी व्यक्त की है।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि उनकी समस्याओं का संतोषजनक निराकरण किए बिना ही कई मामलों को “फोर क्लोज” कर दिया जाता है। ऐसे ही मामला चौरई के विकासखंड शिक्षा केंद्र में देखने को मिला जहां वहां पदस्थ बीआरसी ने प्राइवेट स्कूल संचालक से मिली भगत कर शिकायत को फॉर क्लोज कर दिया । शिकायतकर्ता का कहना है कि शिकायतों के संबंध में उचित जानकारी एवं समाधान नहीं मिला और शिकायत को बंद कर दी गई हैं। जिसके कारण आम नागरिकों में असंतोष बढ़ रहा है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।कुछ शिकायतकर्ताओं ने यह भी दावा किया कि शिकायत की स्थिति जानने या दोबारा आवेदन करने पर उन्हें दबावपूर्ण व्यवहार का सामना करना पड़ा। वहीं संबंधित विभागों की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि सीएम हेल्पलाइन जैसी व्यवस्था की सफलता पारदर्शिता, जवाबदेही और वास्तविक निराकरण पर निर्भर करती है। यदि शिकायतकर्ता संतुष्ट नहीं हैं, तो संबंधित मामलों की निष्पक्ष समीक्षा आवश्यक मानी जाती है।
जिले के नागरिकों ने मांग की है कि सीएम हेल्पलाइन में बंद की गई शिकायतों की समय-समय पर समीक्षा हो तथा शिकायतकर्ताओं से प्रत्यक्ष फीडबैक लेकर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए, ताकि शासन की इस महत्वपूर्ण योजना पर लोगों का विश्वास बना रहे।
अब देखना होगा कि जिला प्रशासन एवं संबंधित विभाग इन शिकायतों को किस गंभीरता से लेते हैं और व्यवस्था में सुधार के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।







