गायखुरी आदिवासी बालक आश्रम में मरम्मत कार्यों पर उठे सवाल, तकनीकी जांच की मांग तेज
पांढुर्णा। जनजातीय कार्य विभाग के अंतर्गत संचालित आदिवासी बालक आश्रम, गायखुरी में हाल ही में हुए मरम्मत कार्यों को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल खड़े हो गए हैं। क्षेत्रीय नागरिकों और सूत्रों के हवाले से सामने आ रही जानकारी के अनुसार, आश्रम में कराए गए बिजली फिटिंग, खिड़की-दरवाजों की मरम्मत तथा रंगाई-पुताई कार्यों की गुणवत्ता को लेकर असंतोष जताया जा रहा है। वहीं लोगों का कहना है कि सिर्फ पुताई कर पूरी राशि निकाली गई है जबकि अभी भवन के खिड़की दरवाजे अभी टूटें हुए हैं और आश्रम भवन में बिजली फिटिंग भी नहीं हुई है आश्रम भवन के खिड़की, दरवाजे मैं अभी भी जाली नहीं लगाई गई है, यंहा पर विभाग के इंजीनियर एवं ठेकेदार एवं जिला संयोजक की मिलीभगत से राशि में भारी हेर फेर किया गया है ..?

मम्मत कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिन कार्यों को कागजों में पूर्ण और संतोषजनक बताया गया है, उनकी जमीनी स्थिति अपेक्षाकृत भिन्न दिखाई देती है। कुछ नागरिकों ने आशंका जताई है कि कार्यों में उपयोग की गई सामग्री की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं हो सकती, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।

तकनीकी जांच और भौतिक सत्यापन की मांग
मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है और नागरिकों ने पूरे कार्य की तकनीकी जांच (Technical Audit) तथा भौतिक सत्यापन (Physical Verification) कराए जाने की मांग उठाई है। लोगों का कहना है कि शासकीय संस्थानों में बच्चों की सुरक्षा से जुड़े कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही गंभीर विषय है और इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता
आदिवासी छात्रावासों में रहने वाले बच्चों की सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर शासन की प्राथमिकता रहती है। ऐसे में मरम्मत कार्यों की गुणवत्ता पर उठ रहे सवालों ने स्थानीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। नागरिकों का कहना है कि यदि कार्य मानकों के अनुसार नहीं हुए हैं, तो इससे बच्चों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
प्रशासन की भूमिका पर नजर
फिलहाल इस पूरे मामले में प्रशासनिक स्तर पर किसी तरह की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। स्थानीय लोग उम्मीद जता रहे हैं कि संबंधित विभाग मामले को गंभीरता से लेते हुए पारदर्शी जांच कराएगा।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या आश्रम के मरम्मत कार्यों की वास्तविक स्थिति सामने लाई जाती है या नहीं।







