कागजों में दौड़ रहा कृषि रथ, किसानों को नहीं मिल रहा लाभ — ग्रामीणों में नाराजगी
छिंदवाड़ा/विशेष संवाददाता: जिले में कृषि विभाग द्वारा किसानों को योजनाओं की जानकारी देने और तकनीकी सलाह उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कृषि रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया है। प्रशासन का दावा है कि कृषि वैज्ञानिक ग्राम पंचायतों तक पहुंचकर किसानों को आधुनिक खेती, प्राकृतिक खेती, नवाई प्रबंधन और ई-टोकन बुकिंग की जानकारी देंगे। लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आ रही है।

ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों का आरोप है कि कृषि विभाग की अधिकांश योजनाएं सिर्फ कागजों तक सीमित हैं। गांवों में कृषि विभाग के कर्मचारी नियमित रूप से नहीं पहुंचते और सालभर में केवल एक-दो दिन औपचारिक दौरा कर खानापूर्ति कर दी जाती है। किसानों का कहना है कि इतने कम समय में न तो सही मार्गदर्शन मिल पाता है और न ही योजनाओं का वास्तविक लाभ।
किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि पहले सरकार द्वारा अनुदान पर मिलने वाले बीज और अन्य कृषि सामग्री उपलब्ध कराई जाती थी, लेकिन अब कई योजनाएं बंद होने से छोटे और सीमांत किसान परेशान हैं। अनुदान की सुविधाएं कम होने से खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि विभाग प्रचार-प्रसार के नाम पर कृषि रथ निकालकर सफलता के दावे कर रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि कृषि वैज्ञानिक और कर्मचारी नियमित रूप से गांवों में रहकर किसानों की समस्याएं सुनें, खेतों का निरीक्षण करें और समय पर मार्गदर्शन दें, तभी ऐसी योजनाएं सार्थक साबित होंगी। केवल रथ चलाकर और कार्यक्रम आयोजित कर फोटो खिंचवाने से किसानों की स्थिति नहीं बदलने वाली।
अब सवाल यह उठ रहा है कि जब किसानों को अनुदान, बीज और समय पर तकनीकी सहायता नहीं मिल रही, तो कृषि रथ जैसी पहल कितनी सफल होगी। किसानों ने शासन से मांग की है कि योजनाओं का वास्तविक क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए और विभागीय कर्मचारियों की गांवों में नियमित उपस्थिति तय की जाए, ताकि खेती से जुड़े लाभ सीधे किसानों तक पहुंच सकें।







