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रेत माफियाओं से भिड़ते हुए वनरक्षक हरकेश गुर्जर शहीद, छिंदवाड़ा वनवृत में गूंजा “अमर रहें” का नारा..

रेत माफियाओं से भिड़ते हुए वनरक्षक हरकेश गुर्जर शहीद, छिंदवाड़ा वनवृत में गूंजा “अमर रहें” का नारा
छिंदवाड़ा (विशेष संवाददाता)।
कर्तव्य पथ पर अडिग रहते हुए रेत माफियाओं से लोहा लेने वाले वनरक्षक स्वर्गीय हरकेश गुर्जर की शहादत ने पूरे वन विभाग को झकझोर कर रख दिया है। मुरैना में 8 अप्रैल 2026 को अवैध रेत परिवहन रोकने के दौरान माफियाओं ने उन पर ट्रैक्टर-ट्रॉली चढ़ाकर निर्ममता से हत्या कर दी। इस दर्दनाक घटना के बाद छिंदवाड़ा वनवृत के अधिकारियों और कर्मचारियों ने गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए श्रद्धांजलि सभा आयोजित की।


संवाद सदन में आयोजित इस सभा में वन विभाग का हर वर्ग भावुक नजर आया। अधिकारियों और कर्मचारियों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित की और हाथों में मोमबत्ती लेकर “हरकेश गुर्जर अमर रहें” के नारों से वातावरण गूंज उठा।
मध्यप्रदेश वन कर्मचारी संघ की प्रांतीय महिला प्रकोष्ठ अध्यक्ष मालती सिंगारे, जिलाध्यक्ष अजय शिवहरे एवं दैनिक वेतनभोगी स्थायी कर्मचारी संघ के अध्यक्ष किशोर साहू ने संयुक्त रूप से घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे वन कर्मियों की सुरक्षा पर सीधा हमला बताया। उन्होंने शासन से मांग की कि स्व. गुर्जर को शहीद का दर्जा दिया जाए, परिवार को 1 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी जाए, एक सदस्य को तत्काल शासकीय नौकरी दी जाए तथा परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
श्रद्धांजलि सभा में पश्चिम वनमंडलाधिकारी साहिल गर्ग, पूर्व वनमंडलाधिकारी स्वरूप दीक्षित, प्रशिक्षु आईएफएस कृतिका जायसवाल, उप वनमंडलाधिकारी सीमा ठाकुर (तामिया), वन परिक्षेत्र अधिकारी सांवरी श्रीमती कीर्तिवाला गुप्ता, छिंदवाड़ा परिक्षेत्र अधिकारी पंकज विसेन सहित बड़ी संख्या में अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।


वनमंडलाधिकारी साहिल गर्ग ने कर्मचारियों से अपील की कि वे स्व. गुर्जर के परिवार की मदद के लिए आगे आएं। वहीं पूर्व वनमंडलाधिकारी स्वरूप दीक्षित ने कहा, “हरकेश गुर्जर ने कर्तव्य निभाते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया है। उनका साहस और समर्पण हम सभी के लिए प्रेरणा है। ऐसे अपराधियों के खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी, लेकिन हमें अपनी सुरक्षा का भी ध्यान रखना होगा।”
सवाल खड़ा करती घटना:
यह घटना एक बार फिर अवैध रेत खनन माफियाओं के बढ़ते हौसले और जमीनी स्तर पर तैनात वन कर्मियों की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।
अंतिम संदेश:
वन विभाग के कर्मचारियों ने एकजुटता का परिचय देते हुए स्पष्ट किया कि वे इस संघर्ष से पीछे नहीं हटेंगे—बल्कि स्व. हरकेश गुर्जर के बलिदान को न्याय दिलाने के लिए और मजबूती से खड़े रहेंगे।