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आदिवासी बालक गायखुरी आश्रम में मरम्मत पर खर्च पर सवाल, लाखों के भुगतान की जांच की मांग…

आदिवासी बालक गायखुरी आश्रम में मरम्मत पर खर्च पर सवाल, लाखों के भुगतान की जांच की मांग…
बिजली फिटिंग, दरवाजे-खिड़की व पुताई कार्य कागजों में पूर्ण बताए जाने के आरोप, जमीनी स्थिति पर उठे प्रश्न

पांढुर्णा(पंचायत दिशा समाचार)
जनजातीय विभाग द्वारा संचालित आदिवासी बालक गायखुरी आश्रम में मरम्मत कार्यों को लेकर गंभीर सवाल सामने आए हैं। आरोप है कि आश्रम में विभिन्न मरम्मत कार्यों के नाम पर लाखों रुपये की राशि आहरित की गई, जबकि मौके पर कई कार्य पूर्ण रूप से दिखाई नहीं दे रहे हैं।


प्राप्त जानकारी एवं स्थानीय स्तर पर सामने आए दावों के अनुसार आश्रम में बिजली फिटिंग, दरवाजे-खिड़की की स्थापना/मरम्मत, पुताई एवं पुट्टी जैसे कार्यों के लिए बजट स्वीकृत किया गया था। हालांकि, कुछ लोगों का कहना है कि स्थल पर निरीक्षण करने पर इन कार्यों की स्थिति संतोषजनक नहीं पाई गई और कई स्थानों पर कार्य अधूरे या अनुपस्थित बताए जा रहे हैं।


स्थानीय सूत्रों के अनुसार, आश्रम में न तो समुचित विद्युत फिटिंग स्पष्ट रूप से दिखाई देती है और न ही सभी कमरों में दरवाजे-खिड़की व्यवस्थित रूप से लगाए गए हैं। पुताई और पुट्टी कार्य को लेकर भी संदेह व्यक्त किया जा रहा है। इसके बावजूद संबंधित ठेकेदार को पूर्ण भुगतान किए जाने की बात कही जा रही है।


मिलीभगत की आशंका, पर पुष्टि बाकी
मामले में विभागीय इंजीनियर एवं ठेकेदार के बीच संभावित मिलीभगत की आशंका व्यक्त की जा रही है। हालांकि, इन आरोपों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
स्थल निरीक्षण और निष्पक्ष जांच की मांग
जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले का स्थल निरीक्षण (फिजिकल वेरिफिकेशन) कराया जाए। साथ ही, यदि अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों एवं ठेकेदार के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
विभाग का पक्ष
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि मामला संज्ञान में आने पर जांच कराई जाएगी और तथ्यों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल मामला आरोपों और दावों के बीच है। निष्पक्ष जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि मरम्मत कार्य वास्तविक रूप से हुए हैं या केवल कागजों तक सीमित हैं

नोट: यह समाचार स्थानीय स्रोतों एवं प्राप्त जानकारी पर आधारित है। आधिकारिक जांच एवं संबंधित पक्षों के विस्तृत बयान के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।