मां को गोद में उठाकर जनसुनवाई तक पहुंचा बेटा, कलेक्ट्रेट की व्यवस्थाओं पर उठे गंभीर सवाल
सरकारी योजनाओं और सुगम पहुंच के दावों के बीच सामने आया सिस्टम का जमीनी चेहरा
छिंदवाड़ा। जिला मुख्यालय स्थित कलेक्ट्रेट में मंगलवार को जनसुनवाई के दौरान सामने आया एक दृश्य प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर गया। अपनी समस्या लेकर जनसुनवाई में पहुंची एक बुजुर्ग महिला को उसके बेटे ने गोद में उठाकर कलेक्ट्रेट परिसर में पहुंचाया। महिला को चलने-फिरने में परेशानी बताई जा रही है।
यह दृश्य सामने आने के बाद सवाल उठ रहा है कि जब शासन और प्रशासन की ओर से बुजुर्गों, दिव्यांगजनों एवं शारीरिक रूप से असमर्थ नागरिकों के लिए सार्वजनिक कार्यालयों में सुगम पहुंच (Accessibility) सुनिश्चित करने पर जोर दिया जाता है, तो जिला मुख्यालय के सबसे महत्वपूर्ण कार्यालयों में शामिल कलेक्ट्रेट में जरूरतमंद नागरिकों के लिए सुविधाएं कितनी प्रभावी हैं?
सुविधा है तो उपयोग में क्यों नहीं आई?
कलेक्ट्रेट में जनसुनवाई का उद्देश्य ही आम नागरिकों की समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाना है। ऐसे में यदि कोई बुजुर्ग या शारीरिक रूप से असमर्थ व्यक्ति अपनी समस्या लेकर कार्यालय पहुंचता है, तो उसके लिए प्रवेश से लेकर संबंधित अधिकारी तक पहुंचने की सुविधा सहज और सम्मानजनक होना अपेक्षित है।
मंगलवार को सामने आए इस दृश्य ने प्रशासन के सामने एक अहम सवाल खड़ा कर दिया है—क्या कलेक्ट्रेट में जरूरतमंदों के लिए व्हीलचेयर उपलब्ध है? क्या रैंप और अन्य सुगम पहुंच की व्यवस्था निर्धारित मानकों के अनुरूप है? यदि व्यवस्था उपलब्ध है तो जनसुनवाई के दौरान उसका उपयोग क्यों नहीं हो सका?
योजनाओं पर खर्च से ज्यादा जरूरी जमीनी क्रियान्वयन
सरकार द्वारा दिव्यांगजनों और बुजुर्ग नागरिकों की सुविधा के लिए विभिन्न योजनाओं और व्यवस्थाओं पर जोर दिया जाता है। लेकिन किसी भी व्यवस्था की वास्तविक सफलता उसके कागजों में दर्ज होने से नहीं, बल्कि जरूरत के समय नागरिक को मिलने वाली सुविधा से तय होती है।

कलेक्ट्रेट जैसे सार्वजनिक कार्यालय में यदि किसी महिला को अपने बेटे की गोद में बैठकर जनसुनवाई तक पहुंचना पड़े, तो यह प्रशासन के लिए व्यवस्था की समीक्षा का विषय जरूर बनता है।
प्रशासन से व्यवस्था स्पष्ट करने की मांग
मामले में किसी अधिकारी या कर्मचारी पर सीधे आरोप लगाने के बजाय यह आवश्यक है कि जिला प्रशासन स्पष्ट करे कि कलेक्ट्रेट में बुजुर्ग एवं दिव्यांग नागरिकों के लिए वर्तमान में कौन-कौन सी सुविधाएं उपलब्ध हैं
जनसुनवाई में अपनी समस्या बताने के लिए किसी मां को बेटे की गोद का सहारा न लेना पड़े—यही किसी भी संवेदनशील और सुगम प्रशासनिक व्यवस्था की पहचान होनी चाहिए।
नोट: यह समाचार जनसुनवाई के दौरान सामने आए दृश्य एवं उससे जुड़े व्यवस्था संबंधी सवालों पर आधारित है। संबंधित प्रशासनिक पक्ष/स्पष्टीकरण प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।






