प्राकृतिक खेती से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते किसान सोविंद उइके
जैविक हाट में 30 सप्ताह में करीब 90 हजार रुपये की सब्जियां बेचकर बढ़ाया आत्मविश्वास
छिंदवाड़ा। जिले के विकासखंड परासिया के ग्राम मंडली निवासी कृषक श्री सोविंद उइके पिछले तीन वर्षों से प्राकृतिक एवं जैविक खेती को अपनाकर खेती के क्षेत्र में प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं। रासायनिक खेती पर निर्भरता कम करते हुए उन्होंने प्राकृतिक एवं जैविक पद्धतियों से विभिन्न सब्जियों और फसलों का उत्पादन शुरू किया है।
श्री उइके अपने खेत में टमाटर, मक्का, बैंगन, भिंडी, बरबटी सहित विभिन्न फसलों का उत्पादन कर रहे हैं। प्राकृतिक तरीके से तैयार अपनी उपज को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के लिए वे स्वयं सब्जियां लेकर जैविक हाट, गुरैया मंडी पहुंचते हैं और सीधे उपभोक्ताओं को विक्रय करते हैं।

30 सप्ताह से लगातार जैविक हाट में विक्रय
श्री सोविंद उइके पिछले 30 सप्ताह से लगातार जैविक हाट में अपनी उपज का विक्रय कर रहे हैं। यहां उन्हें उपभोक्ताओं से सीधे जुड़ने और प्राकृतिक एवं जैविक उत्पादों के बेहतर विपणन का अवसर मिल रहा है। वे प्रत्येक सप्ताह लगभग 2 से 3 हजार रुपये की सब्जियां बेच रहे हैं। इस हिसाब से 30 सप्ताह में उन्होंने करीब 60 हजार से 90 हजार रुपये तक की सब्जियों का विक्रय किया है।
जैविक हाट उनके लिए सिर्फ उपज बेचने का माध्यम नहीं, बल्कि सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंच बनाने का बाजार भी बन गया है। इससे उन्हें ग्राहकों की पसंद, मांग और बाजार की जरूरतों को समझने में भी मदद मिल रही है।

विविध फसलों से बढ़े आय के अवसर
प्राकृतिक एवं जैविक खेती के साथ विभिन्न मौसमों के अनुरूप अलग-अलग फसलों का उत्पादन श्री उइके की खेती की खासियत है। वे मौसम के अनुसार सब्जियों का उत्पादन करते हैं, जिससे जैविक हाट में नियमित रूप से उपज उपलब्ध कराई जा सके। इससे खेती में निरंतरता के साथ अतिरिक्त आय के अवसर भी बढ़े हैं।
श्री उइके का कहना है कि प्राकृतिक खेती अपनाने से उन्हें खेती के नए अनुभव मिले हैं। जैविक हाट के माध्यम से अपनी उपज सीधे ग्राहकों तक पहुंचाने से उन्हें बाजार का बेहतर अनुभव मिला है। नियमित विक्रय से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है और वे भविष्य में भी प्राकृतिक खेती को आगे बढ़ाने के लिए उत्साहित हैं।
अन्य किसानों के लिए बन रहे प्रेरणा
कृषक सोविंद उइके की खेती की यात्रा यह बताती है कि प्राकृतिक एवं जैविक खेती के साथ यदि किसानों को उचित बाजार और प्रत्यक्ष विपणन की सुविधा मिले, तो खेती से अतिरिक्त आय के अवसर बढ़ाए जा सकते हैं।
तीन वर्षों से प्राकृतिक खेती को अपनाने और पिछले 30 सप्ताह से जैविक हाट में नियमित रूप से उपज बेचने की उनकी निरंतरता अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणादायक है। प्राकृतिक खेती, विविध फसल उत्पादन और सीधे बाजार से जुड़ाव के माध्यम से श्री उइके आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।








