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अटैचमेंट का खेल! शिक्षक बने अधीक्षक, अब मूल स्कूल लौटने की बारी कब?


अटैचमेंट का खेल! शिक्षक बने अधीक्षक, अब मूल स्कूल लौटने की बारी कब?

छिंदवाड़ा से पांढुर्णा गए शिक्षक-शिक्षिकाओं पर उठे सवाल, छात्रावासों में अटैचमेंट की व्यवस्था बनी स्थायी जुगाड़ या नियमों की अनदेखी?

छिंदवाड़ा/पांढुर्णा। जनजातीय कार्य विभाग में अटैचमेंट व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। छिंदवाड़ा जिले से पांढुर्णा जिले में अटैचमेंट पर गए शिक्षक-शिक्षिकाएं छात्रावास अधीक्षक और अधीक्षिका की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। अब सवाल यह है कि जिन शिक्षकों को मूल रूप से स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने के लिए नियुक्त किया गया था, वे आखिर कब तक छात्रावासों की व्यवस्था संभालते रहेंगे?

अटैचमेंट या स्थायी नियुक्ति का रास्ता?

शिक्षकों को छात्रावासों में अधीक्षक की जिम्मेदारी सौंपे जाने के बाद व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि अटैचमेंट के नाम पर शिक्षक-शिक्षिकाओं को लंबे समय तक मूल पदस्थापना से दूर रखा जा रहा है। यदि यह व्यवस्था अस्थायी है, तो इसकी समय-सीमा क्या है? और यदि शिक्षकों की जरूरत छात्रावासों में है, तो क्या इसके लिए नियमित पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया अपनाई गई?

छिंदवाड़ा के स्कूलों में शिक्षकों की कमी, पांढुर्णा के छात्रावासों में जिम्मेदारी

एक ओर ग्रामीण स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता और पढ़ाई की व्यवस्था को लेकर सवाल उठते रहे हैं, वहीं दूसरी ओर शिक्षक-शिक्षिकाओं को छात्रावासों में अटैच कर जिम्मेदारियां दी जा रही हैं। ऐसे में शिक्षा व्यवस्था और छात्रावास संचालन के बीच संतुलन को लेकर विभाग को स्पष्ट जवाब देना होगा।

क्या अटैचमेंट के कारण मूल स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था प्रभावित हो रही है? क्या सभी अटैचमेंट नियमों के अनुसार स्वीकृत हैं? क्या अटैच किए गए शिक्षकों की सेवा अवधि, मूल पदस्थापना और वर्तमान जिम्मेदारी का रिकॉर्ड विभाग के पास उपलब्ध है?

सहायक आयुक्त से सीधे सवाल

पांढुर्णा जिले में अटैचमेंट पर कार्यरत शिक्षक-शिक्षिकाओं के संबंध में विभागीय अधिकारियों से कई सवालों के जवाब अपेक्षित हैं।

  • अटैचमेंट पर गए शिक्षक-शिक्षिकाओं की मूल पदस्थापना कहां है?
  • उन्हें छात्रावास अधीक्षक/अधीक्षिका की जिम्मेदारी किस आदेश के तहत दी गई?
  • अटैचमेंट की अवधि कितनी निर्धारित की गई है?
  • क्या सभी शिक्षकों को उनके मूल स्कूलों में वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू हुई है?
  • क्या छात्रावास अधीक्षक के पदों पर नियमित नियुक्ति की जाएगी?
  • क्या अटैचमेंट व्यवस्था की समीक्षा कर नियमों के अनुरूप कार्रवाई की जाएगी?

विभाग की चुप्पी पर भी सवाल

अटैचमेंट व्यवस्था को लेकर लगातार सवाल उठने के बावजूद यदि विभाग स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक नहीं करता है, तो पारदर्शिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। जनजातीय छात्रावासों में बच्चों की पढ़ाई, भोजन, सुरक्षा और अनुशासन की जिम्मेदारी महत्वपूर्ण है। ऐसे में अधीक्षक पदों पर नियुक्ति और अटैचमेंट की व्यवस्था स्पष्ट नियमों के तहत होना जरूरी है।

अब देखना यह है कि जनजातीय कार्य विभाग पांढुर्णा में अटैचमेंट पर कार्यरत शिक्षक-शिक्षिकाओं की स्थिति स्पष्ट करता है या फिर अटैचमेंट की व्यवस्था यूं ही चलती रहेगी।

विभाग का पक्ष: इस संबंध में सहायक संचालक उमेश सतनकर का कहना है कि पांढुर्णा एजुकेशन ब्लॉक है इसलिए अब ये शिक्षक पूरी नौकरी में अधीक्षक/अधीक्षिका ही रहेंगे । क्योंकि यंहा सौसर और पांढुर्णा एजुकेशन ब्लॉक है इसलिए इन शिक्षक शिक्षिकाओं को दुसरी जगह पदस्थ नहीं किया जा सकता है । इन्हें सिर्फ दुसरे छात्रावास में बदला जा सकता है । बाकी विभाग के जो दिशा निर्देश आयेंगे उस हिसाब से इन शिक्षकों की नियुक्ति की जायेगी।

सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग छिंदवाड़ा का कहना..!

इस विषय में जानकारी कार्य विभाग से बात हुई तो उनका कहना है कि हमने पांढुर्णा कलेक्टर महोदय को पत्र लिखा गया है और जिन अधीक्षक/अधीक्षिका की शिकायत आ रही है उन्हें उनकी मूलशाला वापस करने के लिए पत्र लिखा गया है । कलेक्टर महोदय का पत्र का जबाब आने के बाद ही कार्यवाही की जायेगी