पांढुर्णा-सावरगांव के बीच जाम नदी में झंडे पर कब्जे को लेकर हुआ पथराव, 700 पुलिसकर्मी और 22 एंबुलेंस रहीं तैनात
पांढुर्णा। पांढुर्णा में आयोजित प्रसिद्ध पारंपरिक गोटमार मेले में शुक्रवार को एक बार फिर पत्थरबाजी का खतरनाक रूप देखने को मिला। जाम नदी के बीच लगाए गए झंडे पर कब्जे को लेकर पांढुर्णा और सावरगांव पक्ष के लोग आमने-सामने आ गए। दोनों ओर से हुए पथराव में 834 लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। इनमें कई लोगों को सिर में चोटें आईं, जबकि एक व्यक्ति के पैर की हड्डी टूटने की जानकारी है। 9 घायलों की हालत गंभीर बताई गई है।
पत्थरों की बौछार के बीच मेला क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कई लोगों ने पथराव से बचने के लिए सुरक्षित स्थानों की ओर भागकर अपनी जान बचाई। घायलों को मेला क्षेत्र में बनाए गए अस्थायी स्वास्थ्य केंद्रों के साथ ही आवश्यकता अनुसार अस्पताल पहुंचाया गया।
पूर्व विधायक सौसर नानाभाऊ मोहोड
7 स्वास्थ्य केंद्र, 44 डॉक्टर और 22 एंबुलेंस तैनात
प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने मेले में चिकित्सा व्यवस्था के लिए 7 अस्थायी स्वास्थ्य केंद्र बनाए थे। यहां 44 डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई गई थी, जबकि घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए 22 एंबुलेंस तैनात रहीं। प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर घायलों को जरूरत के अनुसार अस्पताल भेजा गया।
700 पुलिसकर्मियों की निगरानी के बावजूद जारी रहा पथराव
मेले की सुरक्षा व्यवस्था के लिए करीब 700 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। मेला क्षेत्र और आसपास के इलाकों में 10 सीसीटीवी कैमरों तथा 3 ड्रोन से निगरानी की गई। इसके बावजूद दोनों पक्षों के बीच पत्थरबाजी जारी रही।
निलेश ऊईक विधायक पांढुर्णा
वर्षों पुरानी परंपरा, हर साल उठते हैं सुरक्षा पर सवाल
पांढुर्णा और सावरगांव के बीच जाम नदी पर पोला पर्व के दूसरे दिन आयोजित होने वाले इस मेले में हजारों लोग शामिल होते हैं। मां चंडिका के पूजन और दर्शन के बाद गोटमार की परंपरा शुरू होती है। दोनों पक्ष नदी के बीच लगाए गए झंडे पर कब्जा करने के लिए एक-दूसरे की ओर पत्थर फेंकते हैं।
प्रशासन की ओर से समय-समय पर पत्थरबाजी रोकने और इसके स्थान पर सुरक्षित विकल्प अपनाने के प्रयास किए जाते रहे हैं। पूर्व में रबर बॉल से आयोजन कराने का प्रयास भी किया गया था, लेकिन वह व्यवस्था ज्यादा देर नहीं चल सकी और दोबारा पत्थरबाजी शुरू हो गई।
गोटमार की शुरुआत को लेकर अलग-अलग किवदंतियां
गोटमार मेले की शुरुआत को लेकर क्षेत्र में कई किवदंतियां प्रचलित हैं। एक मान्यता इसे भोसला राजाओं के सैनिकों के युद्धाभ्यास से जोड़ती है, जबकि दूसरी लोकप्रिय कथा पांढुर्णा के युवक और सावरगांव की युवती की प्रेम कहानी से जुड़ी है। हालांकि इन कथाओं का ऐतिहासिक प्रमाण अलग विषय है और इन्हें स्थानीय लोकमान्यताओं के रूप में ही देखा जाता है।
स्थानीय बुजुर्गों का कहना है कि समय के साथ इस परंपरा का स्वरूप बदलता गया है। उनका दावा है कि गोफन और बढ़ती आक्रामकता जैसे तत्वों ने आयोजन को पहले की तुलना में अधिक जोखिमपूर्ण बना दिया है।








