अपनी ही सरकार में गरीबों से वसूली? जयंत मलैया के बयान ने खड़े किए बड़े सवाल
कलेक्ट्रेट की बैठक में भाजपा के वरिष्ठ विधायक ने उठाए कथित वसूली के मुद्दे, कांग्रेस ने किया तीखा पलटवार
दमोह। मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार और दमोह में सत्ता पक्ष के वरिष्ठ विधायक होने के बावजूद पूर्व मंत्री एवं भाजपा विधायक जयंत मलैया के एक बयान ने प्रशासनिक व्यवस्था और सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित बैठक के दौरान मलैया ने कथित तौर पर नगर पालिका की व्यवस्था को लेकर गरीबों से पैसे लिए जाने का मुद्दा उठाया।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब प्रदेश से लेकर स्थानीय प्रशासन तक भाजपा सरकार की व्यवस्था है, तब उसी सरकार के वरिष्ठ विधायक को सार्वजनिक मंच से गरीबों के साथ कथित वसूली और उनके पैसे खाए जाने जैसे गंभीर मुद्दे उठाने की जरूरत क्यों पड़ी?
कलेक्ट्रेट परिसर में विकास कार्यों और व्यवस्थाओं को लेकर आयोजित बैठक में जयंत मलैया ने अधिकारियों के सामने अपनी नाराजगी जाहिर की। उनके बयान के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर नगर पालिका और प्रशासनिक व्यवस्था में ऐसी क्या स्थिति है, जिस पर सत्ता पक्ष के ही वरिष्ठ नेता को सार्वजनिक रूप से सवाल उठाने पड़ रहे हैं।
मलैया के बयान को कांग्रेस ने तुरंत राजनीतिक मुद्दा बना लिया। कांग्रेस के प्रदेश मीडिया अध्यक्ष मुकेश नायक ने पलटवार करते हुए जयंत मलैया पर तीखी टिप्पणी की और कहा— “जयंत मलैया से सीखो बड़े लोगों से कैसे पैसे वसूले जाते हैं।”
अब इस बयानबाजी ने मामले को केवल प्रशासनिक सवाल तक सीमित नहीं रहने दिया है, बल्कि भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक जुबानी जंग भी तेज हो गई है।
सवालों के घेरे में व्यवस्था
यदि भाजपा विधायक द्वारा उठाई गई कथित वसूली संबंधी शिकायतों में तथ्य हैं, तो सवाल यह उठता है कि जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई हुई? और यदि आरोप निराधार हैं, तो प्रशासन की ओर से स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं की जा रही?
वरिष्ठ विधायक के बयान के बाद अब लोगों की निगाहें जिला प्रशासन और नगर पालिका पर टिकी हैं कि इस मामले में कोई जांच या आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आता है या नहीं।
फिलहाल यह स्पष्ट है कि अपनी ही सरकार और प्रशासनिक व्यवस्था पर सत्ता पक्ष के वरिष्ठ विधायक द्वारा उठाए गए सवालों ने दमोह की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।
नोट: खबर में उल्लिखित कथित वसूली और अन्य आरोप संबंधित नेताओं के सार्वजनिक बयानों के आधार पर हैं। पंचायत दिशा समाचार इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि का दावा नहीं करता। संबंधित अधिकारियों या नगर पालिका का पक्ष उपलब्ध होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।








