बीज वाली राखी बांधेगी भाई की कलाई, फिर बनेगी पौधा
रक्षाबंधन पर पर्यावरण संरक्षण और लोकल फॉर वोकल का अनूठा संदेश, स्वसहायता समूह की महिलाओं ने तैयार की ईको-फ्रेंडली राखियां
विशेष रिपोर्ट- रामकुमार राजपूत
छिंदवाड़ा। रक्षाबंधन का पर्व इस बार भाई-बहन के पवित्र रिश्ते के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दे रहा है। छिंदवाड़ा में बीज से बनी ईको-फ्रेंडली राखियां तैयार की गई हैं, जो रक्षाबंधन के बाद कचरा बनने के बजाय मिट्टी में जाकर पौधे का रूप लेंगी। इस अनूठी पहल के जरिए प्रकृति संरक्षण के साथ लोकल फॉर वोकल को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

मॉडल फ्यूचर कला एवं तकनीकी शिक्षा समिति तथा बहुउद्देशीय शैक्षणिक विकास समिति के माध्यम से स्वसहायता समूह की महिलाओं ने इन विशेष राखियों को तैयार किया है। राखी बनाने में वेस्ट पेपर की लुग्दी, सूती धागे और प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल किया गया है। प्राकृतिक रंग तैयार करने के लिए हल्दी, नींबू और चुकंदर जैसी सामग्री का उपयोग किया गया है।

राखी में छिपा है हरियाली का संदेश
इन सीड राखियों की सबसे खास बात इनमें लगाए गए फल, सब्जियों और फूलों के बीज हैं। राखियों में भिंडी, लौकी, ककड़ी, टमाटर, मिर्च, गेंदे और अपराजिता सहित विभिन्न पौधों के बीज शामिल किए गए हैं। यानी भाई की कलाई पर बंधने वाली राखी कुछ समय बाद मिट्टी में पहुंचकर नई जिंदगी की शुरुआत करेगी।
रक्षाबंधन के बाद राखी को मिट्टी में लगाने पर कागज की लुग्दी जैविक रूप से विघटित हो जाएगी और उसमें मौजूद बीज अनुकूल परिस्थितियों में अंकुरित होकर पौधे का रूप ले सकेंगे। इस तरह राखी का इस्तेमाल होने के बाद भी उसका उद्देश्य खत्म नहीं होता, बल्कि वह पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक छोटा कदम बन जाती है।

महिलाओं के हुनर को भी मिला मंच
इस पहल का एक महत्वपूर्ण पक्ष स्वसहायता समूह की महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार और उनके हुनर को पहचान दिलाना भी है। महिलाओं द्वारा तैयार की गई इन राखियों ने पारंपरिक राखी के साथ पर्यावरण हितैषी सोच को जोड़ा है। आयोजकों का कहना है कि स्थानीय संसाधनों और महिलाओं की रचनात्मकता से तैयार यह पहल पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
भाई-बहन के स्नेह के पर्व पर कलाई पर बंधने वाली यह राखी संदेश दे रही है कि रिश्तों की डोर के साथ प्रकृति से रिश्ता मजबूत करना भी हमारी जिम्मेदारी है। बीज वाली राखियों के जरिए इस बार का रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम के साथ हरियाली और पर्यावरण संरक्षण की यादगार पहल बन रहा है।
पंचायत दिशा समाचार की विशेष रिपोर्ट








