एक हॉस्टल में तीन शिक्षिकाएं, नियमों पर सवाल!
आदिवासी पोस्ट मैट्रिक कन्या छात्रावास में प्रभार को लेकर शिकायत, जनजातीय कार्य विभाग के सहायक आयुक्त पर नियमों की अनदेखी के आरोप
छिंदवाड़ा। जनजातीय कार्य विभाग द्वारा संचालित छात्रावासों में अधीक्षक/अधीक्षिका की पदस्थापना और प्रभार व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जिला मुख्यालय स्थित आदिवासी पोस्ट मैट्रिक सीनियर कन्या छात्रावास में एक ही छात्रावास का प्रभार तीन शिक्षिकाओं को दिया गया है। यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही हैं, तो यह विभागीय व्यवस्था और शासन के निर्धारित प्रावधानों की समीक्षा की मांग करता है।
शिकायत के अनुसार, आदिवासी सीनियर कन्या पोस्ट मैट्रिक हॉस्टल में उषा भलावी, रघुवंशी मैडम और प्रीति कवरेती नामक तीन शिक्षिकाओं को प्रभार दिए जाने का उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता का दावा है कि निर्धारित व्यवस्था के अनुसार एक छात्रावास में अधीक्षक/अधीक्षिका की जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से तय होनी चाहिए। ऐसे में एक ही छात्रावास में तीन शिक्षिकाओं को प्रभार दिए जाने का आधार क्या है, यह जांच का विषय बन गया है।
नियम एक, प्रभार तीन—किसके आदेश पर?
मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि छात्रावास की व्यवस्था के लिए एक जिम्मेदार अधीक्षक/अधीक्षिका की आवश्यकता है, तो एक ही छात्रावास में तीन शिक्षिकाओं को प्रभार देने की जरूरत क्यों पड़ी? शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि जनजातीय कार्य विभाग के सहायक आयुक्त सत्येंद्र सिंह मरकाम द्वारा नियमों की अनदेखी करते हुए यह व्यवस्था की गई। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
स्कूलों में शिक्षकों का टोटा, मुख्यालय में अतिशेष की शिकायत
शिकायत में विभाग की व्यापक कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि आदिवासी अंचल के कई स्कूल शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं, जबकि जिला मुख्यालय पर कुछ शिक्षक-शिक्षिकाओं को लंबे समय से विभिन्न कार्यालयीन कार्यों, छात्रावासों और आश्रम शालाओं से जोड़कर रखा गया है। इससे ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के विद्यार्थियों की शिक्षा प्रभावित होने की आशंका जताई गई है।
शिकायतकर्ता ने सुभाष देशपांडे नामक शिक्षक के लंबे समय से जिला मुख्यालय स्थित जनजातीय कार्य विभाग में अटैचमेंट पर कार्य करने का भी आरोप लगाया है। शिकायत के मुताबिक वे वर्तमान में जुन्नारदेव विकासखंड के कटकूही हाईस्कूल में पदस्थ हैं, लेकिन लंबे समय से जिला मुख्यालय पर विभागीय कार्यों से जुड़े हुए हैं। स्थापना, पेंशन, न्यायालयीन प्रकरण, अनुकंपा नियुक्ति तथा छात्रावास अधीक्षक की पदस्थापना जैसे कार्यों में उनकी भूमिका को लेकर भी शिकायत में सवाल उठाए गए हैं।
जिला मुख्यालय की पोस्टिंग को लेकर ‘चढ़ावे’ के आरोप
मामले को और गंभीर बनाते हुए शिकायतकर्ता और सूत्रों ने आरोप लगाया है कि शिक्षकों को जिला मुख्यालय में पदस्थ या अटैच कराने तथा छात्रावास-अधीक्षक का प्रभार दिलाने के लिए कथित तौर पर आर्थिक चढ़ावे होता है। शिकायत में यहां तक आरोप लगाया गया है कि इस कथित व्यवस्था में विभागीय स्तर पर कुछ कर्मचारियों की भूमिका रहती है।
हालांकि आर्थिक ‘चढ़ावे’ से जुड़े आरोप गंभीर हैं और इनकी स्वतंत्र जांच एवं प्रमाण के आधार पर ही पुष्टि की जा सकती है। विभाग के संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद तस्वीर और स्पष्ट होगी।
वर्षों से जमे अटैचमेंट पर भी उठे सवाल..!
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब शासन लगातार शिक्षकों को मूल पदस्थापना वाले स्कूलों में भेजने और शैक्षणिक व्यवस्था मजबूत करने की बात कर रहा है, तो शिक्षक वर्षों तक जिला मुख्यालय के कार्यालयों में अटैच कैसे रह सकते हैं? यदि किसी शिक्षक की सेवाएं वास्तव में विभागीय कार्यालय में आवश्यक हैं, तो उसके लिए सक्षम स्तर से विधिवत आदेश और समय-समय पर समीक्षा क्यों नहीं की जाती?
शिकायतों के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं?
शिकायतकर्ता का आरोप है कि छात्रावासों और शिक्षकों की पदस्थापना से जुड़े मामलों में लगातार शिकायतें सामने आने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है। ऐसे में अब पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, संबंधित आदेशों की समीक्षा और पदस्थापना/प्रभार से जुड़े रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जाने की मांग उठ रही है।
अब जवाबदेही तय करने की जरूरत
एक तरफ आदिवासी अंचल के स्कूल शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं और दूसरी तरफ जिला मुख्यालय पर शिक्षकों की मौजूदगी, अटैचमेंट और छात्रावास प्रभार को लेकर सवाल उठ रहे हैं। यदि एक ही छात्रावास में तीन शिक्षिकाओं को प्रभार दिए जाने की शिकायत सही है, तो इसके पीछे प्रशासनिक आवश्यकता क्या थी और आदेश किस नियम के तहत जारी हुए—इन सवालों का जवाब विभाग को देना चाहिए।
अब देखना यह है कि जिला प्रशासन और जनजातीय कार्य विभाग इस शिकायत की निष्पक्ष जांच कराते हैं या नहीं। साथ ही यह भी स्पष्ट होगा कि छात्रावासों में प्रभार देने की प्रक्रिया किस नियम के तहत हुई और वर्षों से जिला मुख्यालय में अटैच शिक्षकों की सेवाओं की समीक्षा कब होगी।
एपिसोड-2
रिपोर्ट -रामकुमार राजपूत
मोबाइल -8989115284
नोट /इस समाचार में उल्लेखित आरोप शिकायतों और उपलब्ध जानकारी पर आधारित हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। संबंधित अधिकारियों और व्यक्तियों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा। पाठक किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक जांच और प्रमाणित तथ्यों की प्रतीक्षा करें।








