कश्मीर जैसी खूबसूरती, शिमला जैसी ठंड चाहिए तो तामिया आइए
मेघ, मल्हार और माटी का अनूठा संगम बना सावन महोत्सव, रिमझिम फुहारों और कोहरे के बीच उमड़े पर्यटक
महाराष्ट्र-कर्नाटक सहित प्रदेश के कई शहरों से पहुंचे सैलानी, सावन के झूले और आदिवासी कला बने आकर्षण का केंद्र
रिपोर्ट : रामकुमार राजपूत | छिंदवाड़ा
छिंदवाड़ा/तामिया। सतपुड़ा की वादियों में इन दिनों सावन की हरियाली, रिमझिम फुहारें और घना कोहरा पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं। तामिया में आयोजित सावन महोत्सव मेघ, मल्हार और माटी के अनूठे संगम के रूप में ग्रामीण पर्यटन को नई पहचान दे रहा है। यही वजह है कि महाराष्ट्र, कर्नाटक सहित मध्यप्रदेश के विभिन्न शहरों से बड़ी संख्या में पर्यटक तामिया पहुंच रहे हैं।
बारिश के मौसम में तामिया की प्राकृतिक सुंदरता देखते ही बन रही है। पहाड़ों पर छाई हरियाली, बादलों की आवाजाही और ठंडी हवाओं के बीच पर्यटक यहां के प्राकृतिक नजारों का आनंद ले रहे हैं। महोत्सव स्थल पर लगाए गए सावन के झूले बच्चों से लेकर बड़ों तक के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बने हुए हैं।
ग्रामीण पर्यटन और होम स्टे को मिल रहा बढ़ावा
सावन महोत्सव का उद्देश्य ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना भी है। पर्यटन ग्रामों में विकसित किए जा रहे होम स्टे पर्यटकों को ग्रामीण जीवन, स्थानीय खान-पान और संस्कृति से रूबरू करा रहे हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के नए अवसर भी तैयार हो रहे हैं।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड के डायरेक्टर (कौशल) डीपी सिंह ने जिले में संचालित होम स्टे की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन के सहयोग से पर्यटन ग्रामों में विभिन्न गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। जिले में वर्तमान में 57 होम स्टे संचालित हैं, जबकि करीब 100 होम स्टे विकसित किए जाने की योजना है।

आदिवासी कला और स्थानीय उत्पादों ने मोहा मन
जिला पुरातत्व, पर्यटन एवं संस्कृति परिषद के माध्यम से आयोजित सावन महोत्सव में पर्यटकों के लिए स्थानीय संस्कृति और परंपराओं को प्रदर्शित करने की व्यवस्था की गई है। यहां आदिवासी आर्ट, हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पादों की बिक्री की जा रही है।
पर्यटकों को पर्यटन ग्राम सावरवानी का देसी घी और चोपना का मावा भी उपलब्ध कराया जा रहा है। स्थानीय उत्पादों को बाजार मिलने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

आदिवासी धुन पर सांसद ने थामा ढोल, जमकर थिरके
सावन महोत्सव में पहुंचे सांसद बंटी विवेक साहू भी आदिवासी संस्कृति के रंग में रंगे नजर आए। कार्यक्रम के दौरान उन्हें गोंड आर्ट की पेंटिंग भेंट की गई। इसके बाद पर्यटन ग्राम घटलिंगा से आए आदिवासी नृत्य दल के साथ सांसद ने ढोल थामा और कलाकारों के साथ नृत्य किया।
सांसद ने महोत्सव में स्थानीय व्यंजनों का भी स्वाद लिया। उन्होंने महुए की पुड़ी, समा की खीर और बरबटी की दाल के बड़े का आनंद लिया। आदिवासी लोकधुनों और पारंपरिक नृत्य ने पूरे माहौल को उत्सव के रंग में रंग दिया।
तामिया बन रहा मानसून पर्यटन का आकर्षण
सावन महोत्सव के जरिए तामिया की प्राकृतिक सुंदरता के साथ यहां की आदिवासी संस्कृति, स्थानीय खान-पान, हस्तशिल्प और ग्रामीण जीवन को पर्यटकों के सामने प्रस्तुत किया जा रहा है। इससे आने वाले समय में तामिया और आसपास के पर्यटन ग्रामों में पर्यटकों की संख्या बढ़ने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है।








