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सड़क के अभाव में 8 किमी डोली का सफर, अस्पताल पहुंचने से पहले गर्भस्थ शिशु की मौत

सड़क के अभाव में 8 किमी डोली का सफर, अस्पताल पहुंचने से पहले गर्भस्थ शिशु की मौत..
छिंदवाड़ा/जुन्नारदेव। आदिवासी अंचलों में विकास और स्वास्थ्य सुविधाओं के दावों के बीच जुन्नारदेव विकासखंड के गोपतराई क्षेत्र से सामने आई एक घटना ने जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर दिए हैं। गोपतराई के चीटीपाठा जामुनटोला गांव में प्रसव पीड़ा से परेशान महिला को अस्पताल पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को कपड़े की डोली का सहारा लेना पड़ा। करीब 8 किलोमीटर तक उबड़-खाबड़ रास्ते पर पैदल चलकर महिला को गोपतराई लाया गया। यहां से एंबुलेंस के माध्यम से उसे दमुआ अस्पताल ले जाया गया। परिजनों के मुताबिक, अस्पताल पहुंचने तक गर्भस्थ शिशु की मौत हो चुकी थी। महिला की गंभीर हालत को देखते हुए उसे जिला अस्पताल छिंदवाड़ा रेफर किया गया, जहां वह ICU में उपचाररत बताई जा रही है।


सुबह छह बजे शुरू हुआ डोली का सफर
जानकारी के अनुसार गांव के सोनू मलगाम की पत्नी कस्तूरिया को प्रसव पीड़ा होने पर परिवार के सामने सबसे बड़ी चुनौती अस्पताल पहुंचाने की थी। गांव तक सड़क सुविधा नहीं होने के कारण ग्रामीणों और रिश्तेदारों ने कपड़े की डोली तैयार की। सुबह करीब 6 बजे महिला को डोली में लेकर ग्रामीण पैदल गोपतराई की ओर रवाना हुए। लगभग 8 किलोमीटर का मुश्किल रास्ता तय करने के बाद महिला को गोपतराई पहुंचाया गया, जहां से एंबुलेंस द्वारा दमुआ अस्पताल ले जाया गया।


हालत गंभीर, जिला अस्पताल रेफर
परिजनों के अनुसार दमुआ अस्पताल पहुंचने तक गर्भस्थ शिशु की मौत हो चुकी थी। महिला की हालत गंभीर होने पर चिकित्सकों ने उसे जिला अस्पताल छिंदवाड़ा रेफर किया। फिलहाल महिला के ICU में उपचाररत होने की जानकारी सामने आई है।


2016 से सड़क की मांग का दावा
गांव की सरपंच सियाबती नर्रे के मुताबिक, गांव में सड़क निर्माण के लिए वर्ष 2016 से ग्रामसभा के माध्यम से प्रस्ताव भेजे जाते रहे हैं। सरपंच का कहना है कि सड़क निर्माण की मांग मुख्यमंत्री, कलेक्टर और विधायक तक पहुंचाई गई, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका।


ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के दौरान गांव तक पहुंचने वाला कच्चा रास्ता और भी खराब हो जाता है। इससे मरीजों और गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाने में परेशानी होती है।
पहले भी डोली से अस्पताल पहुंचाने का दावा
सरपंच के अनुसार, इससे पहले भी दीनबत्ती नर्रे और रेखा मलगाम को प्रसव पीड़ा के दौरान डोली के माध्यम से अस्पताल ले जाना पड़ा था। ग्रामीणों ने कुछ अन्य मौतों को भी समय पर इलाज और सड़क सुविधा की कमी से जोड़कर दावे किए हैं। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हो सकी है।

कंचन दुबे सिविल सर्जन छिंदवाड़ा

जिम्मेदारों से सवाल
चीटीपाठा जामुनटोला की घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि गांव तक सड़क सुविधा उपलब्ध हो और आपात स्थिति में एंबुलेंस समय पर पहुंच सके, तो मरीजों को इस तरह डोली के सहारे अस्पताल तक ले जाने की मजबूरी नहीं होगी। अब ग्रामीण सड़क निर्माण की मांग के साथ प्रशासन से इस मामले में आवश्यक कार्रवाई और स्थायी समाधान की उम्मीद कर रहे हैं।