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15 साल से मूलशाला से दूर शिक्षिका, सौसर में अधीक्षिका की कुर्सी पर मेहरबानी?

15 साल से मूलशाला से दूर शिक्षिका, सौसर में अधीक्षिका की कुर्सी पर मेहरबानी?
जनजातीय विभाग के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, नियमों की निगरानी करने वाले भी घेरे में
छिंदवाड़ा/सौसर। जनजातीय कार्य विभाग के अधीन संचालित कन्या छात्रावासों की व्यवस्थाओं को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। सौसर स्थित कन्या छात्रावास में शिक्षिका श्यामवती इवनाती के लंबे समय से अधीक्षिका के रूप में बने रहने को लेकर विभागीय व्यवस्था और शासन के नियमों पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
आरोप है कि श्यामवती इवनाती करीब 15 वर्षों से अपनी मूलशाला से दूर सौसर में अधीक्षिका के रूप में कार्य कर रही हैं। सवाल यह है कि यदि उनकी मूल पदस्थापना किसी विद्यालय में है, तो इतने लंबे समय तक उन्हें छात्रावास में अधीक्षिका का प्रभार किस आदेश और किस नियम के तहत दिया गया? इस दौरान उनके प्रभार को लगातार जारी रखने की अनुमति किस स्तर से दी गई?
सहायक आयुक्त और सहायक संचालक की भूमिका पर सवाल..!
मामले में सहायक आयुक्त छिंदवाड़ा एवं सहायक संचालक पांढुर्णा की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। शासन स्तर पर छात्रावास अधीक्षकों की नियुक्ति और प्रभार के लिए दिशा-निर्देश निर्धारित हैं। वर्ष 2015 के शासन आदेश के संदर्भ में विधानसभा में भी छात्रावास अधीक्षकों की पदस्थापना/प्रभार व्यवस्था का उल्लेख किया जा चुका है।
ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि एक शिक्षिका वर्षों से अपनी मूलशाला के बजाय छात्रावास में अधीक्षिका के रूप में कार्यरत हैं, तो उनकी पदस्थापना, कार्यमुक्ति, प्रभार आदेश और सेवा अभिलेखों की जांच अब तक क्यों नहीं हुई?
कन्या छात्रावास में परिवार के रहने का आरोप
सबसे गंभीर सवाल छात्रावास परिसर में अधीक्षिका के परिवार के कथित रूप से रहने को लेकर उठ रहे हैं। आरोप है कि अधीक्षिका अपने परिवार के साथ छात्रावास परिसर में रह रही हैं।
यदि यह तथ्य सही है तो विभाग को स्पष्ट करना चाहिए कि कन्या छात्रावास परिसर में अधीक्षिका के परिवार के सदस्यों के रहने की अनुमति किस आदेश के तहत दी गई है? क्या छात्रावास की सुरक्षा एवं अनुशासन संबंधी व्यवस्थाओं में परिवार के सदस्यों के आवागमन के लिए कोई लिखित अनुमति है?
शाम के बाद पुरुषों के प्रवेश पर भी सवाल
कन्या छात्रावासों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर प्रश्न खड़े किए जा रहे हैं। आरोप है कि छात्रावास में शाम के बाद पुरुषों के प्रवेश को लेकर प्रतिबंधात्मक व्यवस्था है, इसके बावजूद अधीक्षिका के बेटे के छात्रावास परिसर में आने-जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
यदि ऐसा हो रहा है तो छात्रावास की विजिटर रजिस्टर, सीसीटीवी फुटेज और प्रवेश-निकास रिकॉर्ड की जांच से स्थिति स्पष्ट हो सकती है। विभाग को यह भी बताना चाहिए कि छात्रावास में बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश को लेकर लागू नियमों का पालन कौन सुनिश्चित कर रहा है।
निगरानी करने वाले अधिकारी आखिर क्यों मौन?
छात्रावासों की निगरानी और व्यवस्थाओं की जांच के लिए विभागीय अधिकारियों की जिम्मेदारी निर्धारित है। ऐसे में सवाल है कि मंडल संयोजक एवं सहायक संचालक द्वारा नियमित निरीक्षण के दौरान यह स्थिति नजर नहीं आई या फिर शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं की गई?
विभागीय योजनाओं के तहत छात्र-छात्राओं को आवास, भोजन सहित अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए छात्रावास संचालित किए जाते हैं।
अब सवाल सिर्फ एक अधीक्षिका के लंबे समय से पद पर बने रहने का नहीं, बल्कि नियमों की निगरानी करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही का भी है।
विभाग से जांच की मांग
पूरे मामले में निष्पक्ष जांच कर श्यामवती इवनाती की मूल पदस्थापना, पिछले 15 वर्षों के अधीक्षक/प्रभार आदेश, वेतन एवं कार्यस्थल संबंधी रिकॉर्ड, छात्रावास निरीक्षण पंजी, विजिटर रजिस्टर तथा परिवार के सदस्यों के छात्रावास परिसर में रहने और आने-जाने से संबंधित अनुमति की जांच कराई जानी चाहिए।
यदि जांच में नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जवाबदेही तय कर कार्रवाई की जानी चाहिए।

टीप- इस विषय में जनजातीय कार्य विभाग के अधिकारी एंव संबंधित छात्रावास अधीक्षिका से दूरभाष पर बात नहीं हो पाई यदि उनका पक्ष आता है तो उसे भी पंचायत दिशा समाचार प्रमुखता से प्रकाशित करेगा।