शिकायत के बाद भी नहीं जागा विभाग, खराब बास्केटबॉल कोर्ट को बताया तकनीकी रूप से सही!
तामिया खेल परिसर में गुणवत्ता पर सवाल, जगह-जगह क्रैक और निकल रही गिट्टी; 181 की शिकायत पर विभाग ने निर्माण सामग्री को बताया कारण, कार्रवाई के बजाय शिकायत बंद करने की तैयारी
छिंदवाड़ा/तामिया। आवासीय खेल परिसर तामिया में निर्मित बास्केटबॉल कोर्ट की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। कोर्ट की सतह पर जगह-जगह दरारें दिखाई दे रही हैं और कई हिस्सों में गिट्टी बाहर निकलने की शिकायत सामने आई है। इसके बावजूद जनजातीय कार्य विभाग द्वारा की गई 181 शिकायत की कार्रवाई पर दिए गए जवाब ने पूरे मामले को और सवालों के घेरे में ला दिया है।
शिकायतकर्ता के अनुसार, बास्केटबॉल कोर्ट का निर्माण निर्धारित गुणवत्ता और मानकों के अनुरूप नहीं किया गया है। कोर्ट की सतह खराब होने के बावजूद विभाग ने निर्माण की गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच अथवा भौतिक सत्यापन कराने के बजाय शिकायत में दर्ज स्थिति का अलग कारण बताते हुए मामला समाप्त करने की दिशा में कदम बढ़ाया है।

181 के जवाब में विभाग ने क्या कहा?
13 अगस्त 2026 को जारी शिकायत निराकरण में विभाग ने बताया कि खेल परिसर तामिया में विभिन्न लघु निर्माण एवं मरम्मत कार्य ई-निविदा के माध्यम से चयनित फर्म के जरिए तकनीकी अमले की देखरेख में कराए गए हैं। मैदान में गिट्टी-पत्थर फैलने के संबंध में विभाग ने बताया कि वर्तमान में सीएम राइज तामिया के छात्रावास भवन का निर्माण प्रारंभ है और निर्माण सामग्री मैदान में रखी गई है।
विभाग ने अपने जवाब में यह भी उल्लेख किया कि पूर्व में इसी मैदान पर भवन निर्माण के लिए कांक्रीट प्लांट स्थापित किया गया था, जिसके कारण रेत, गिट्टी आदि सामग्री मैदान में बिखरी थी। साथ ही विद्यार्थियों के जूते पहनकर अभ्यास करने और खेल परिसर में खेल सामग्री उपलब्ध कराए जाने का उल्लेख करते हुए शिकायत बंद करने का प्रस्ताव किया गया है।

लेकिन असली सवाल कोर्ट की सतह का है
शिकायतकर्ता का कहना है कि मामला केवल मैदान में पड़ी गिट्टी या विद्यार्थियों के जूते पहनकर अभ्यास करने का नहीं है। यदि बास्केटबॉल कोर्ट की निर्मित सतह में ही जगह-जगह क्रैक पड़ रहे हैं और गिट्टी निकल रही है, तो इसकी तकनीकी जांच जरूरी है।
सवाल यह भी है कि यदि कोर्ट का निर्माण निर्धारित मानकों के अनुसार हुआ है तो उसकी सतह इतनी जल्दी खराब क्यों हुई? क्या निर्माण में निर्धारित सामग्री और निर्धारित मोटाई का इस्तेमाल हुआ? क्या बेस, कंक्रीट तथा अंतिम स्पोर्ट्स कोटिंग की गुणवत्ता की जांच कराई गई? क्या निर्माण के बाद संबंधित तकनीकी अधिकारियों ने गुणवत्ता परीक्षण और भौतिक सत्यापन किया था?
ठेकेदार और इंजीनियर की भूमिका पर भी उठे सवाल
करोड़ों रुपये की लागत से संचालित खेल परिसर में खिलाड़ियों के लिए बनाए गए खेल मैदान की गुणवत्ता पर सवाल उठना गंभीर विषय है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि विभागीय अधिकारियों द्वारा मामले की निष्पक्ष जांच कराने के बजाय निर्माण एजेंसी और संबंधित तकनीकी अमले को बचाने का प्रयास किया जा रहा है।
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में पूरे मामले में स्वतंत्र तकनीकी जांच, मौके का पंचनामा, निर्माण की माप पुस्तिका (MB), स्वीकृत एस्टीमेट/BOQ, भुगतान विवरण और गुणवत्ता परीक्षण रिपोर्ट सार्वजनिक किए जाने की जरूरत है।
विभाग के जवाब से ही उठ रहे कई सवाल
यदि कोर्ट की सतह में निर्माण संबंधी खामी नहीं है, तो विभाग को मौके पर तकनीकी जांच कराकर यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्रैक और गिट्टी निकलने का वास्तविक कारण क्या है। केवल मैदान में निर्माण सामग्री रखे होने अथवा विद्यार्थियों के जूते पहनकर अभ्यास करने को कारण बताना पर्याप्त है या नहीं, यह तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकता है।
अब सवाल यह है कि क्या जनजातीय कार्य विभाग इस बास्केटबॉल कोर्ट का स्वतंत्र भौतिक एवं तकनीकी सत्यापन कराएगा, या 181 शिकायत के जवाब के आधार पर मामला बंद कर दिया जाएगा?
स्थानीय स्तर पर मांग उठ रही है कि वरिष्ठ अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंचकर कोर्ट की गुणवत्ता की जांच करे और यदि निर्माण में तकनीकी कमी पाई जाती है तो संबंधित एजेंसी एवं जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।





