दो बार मौत को मात, फिर भी नहीं रुका जुनून: 25 हजार से अधिक सांपों को दिया नया जीवन
छिंदवाड़ा। जहां अधिकांश लोग सांप का नाम सुनते ही घबरा जाते हैं, वहीं छिंदवाड़ा के स्नेक कैचर हेमंत गोदरे पिछले 35 वर्षों से निडर होकर सांपों का रेस्क्यू कर रहे हैं। अब तक वे 25 हजार से अधिक सांपों को सुरक्षित पकड़कर जंगल में छोड़ चुके हैं, जिससे न केवल हजारों लोगों की जान बची, बल्कि वन्यजीव संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान मिला है।

हेमंत गोदरे बताते हैं कि उन्होंने करीब 35 वर्ष पहले सांपों का रेस्क्यू शुरू किया था। शुरुआत में वे केवल छिंदवाड़ा शहर में ही रेस्क्यू करते थे, लेकिन 2014 में नगर निगम क्षेत्र के विस्तार के बाद ग्रामीण इलाकों में भी लोगों की मदद के लिए पहुंचने लगे। आज शहर से लेकर गांव तक कहीं भी सांप निकलने की सूचना मिलते ही वे बिना देर किए मौके पर पहुंच जाते हैं।

हालांकि यह सफर आसान नहीं रहा। रेस्क्यू के दौरान दो बार कोबरा सांप के काटने से वे गंभीर रूप से घायल हुए और मौत के मुंह तक पहुंच गए। समय पर इलाज मिलने से उनकी जान बच गई। इन घटनाओं के बावजूद उनका हौसला नहीं टूटा और उन्होंने सांपों के रेस्क्यू का कार्य जारी रखा।
हेमंत गोदरे का कहना है कि सांप पर्यावरण की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। वे लोगों से अपील करते हैं कि सांप दिखने पर उसे मारने के बजाय प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम को सूचना दें, ताकि इंसानों और वन्यजीवों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
वन्यजीव संरक्षण के प्रति उनका समर्पण और साहस उन्हें जिले में एक अलग पहचान दिलाता है। दो बार मौत से जूझने के बाद भी उनका यह सेवा कार्य आज भी उसी उत्साह के साथ जारी है।








