बफर ज़ोन बना ‘मौत का इलाका’? वन्यजीव के हमले में एक और बुजुर्ग की मौत, 8 माह में 6वीं जान गई
मवेशी चराने गए बुजुर्ग पर वन्यजीव का हमला, लगातार हो रही घटनाओं के बीच वन विभाग की रणनीति पर उठ रहे सवाल
छिंदवाड़ा/बिछुआ। बिछुआ क्षेत्र के बफर ज़ोन में वन्यजीव के हमले में एक और बुजुर्ग की मौत हो गई। जानकारी के अनुसार बुजुर्ग मवेशी चराने गए थे, तभी उन पर वन्यजीव ने हमला कर दिया। सूचना मिलते ही वन विभाग और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची तथा पंचनामा और जांच की कार्रवाई शुरू कर दी।
इस ताज़ा घटना के साथ ही पिछले आठ महीनों में वन्यजीव के हमलों से छह लोगों की मौत होने की बात सामने आ रही है। लगातार हो रही घटनाओं ने बफर क्षेत्र के ग्रामीणों में भय और नाराज़गी का माहौल पैदा कर दिया है।
ग्रामीणों का कहना है कि वन्यजीवों की बढ़ती गतिविधियों के बावजूद प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था और रोकथाम के उपाय पर्याप्त दिखाई नहीं दे रहे हैं। उनका आरोप है कि बार-बार घटनाएं होने के बाद भी स्थायी समाधान नहीं निकल पा रहा है, जिससे लोगों में असुरक्षा की भावना बढ़ रही है।
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले भी वन्यजीव के हमले के बाद ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा था और वन विभाग के कार्यालय में तोड़फोड़ की घटना सामने आई थी। अब एक और मौत के बाद सवाल फिर उठ रहे हैं कि क्या बफर क्षेत्र के ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त और प्रभावी कदम उठाए जाएंगे, या ऐसी घटनाएं आगे भी जारी रहेंगी?
फिलहाल वन विभाग का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं ग्रामीण प्रभावित क्षेत्रों में गश्त बढ़ाने, वन्यजीवों की निगरानी और सुरक्षा उपायों को और मजबूत करने की मांग कर रहे हैं।
नोट: इस खबर में वन विभाग की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों को आरोपों और सार्वजनिक चिंताओं के रूप में प्रस्तुत किया गया है। जब तक जांच पूरी नहीं होती, किसी अधिकारी की व्यक्तिगत जिम्मेदारी स्थापित नहीं मानी जा सकती।








