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छात्रावासों में बच्चों की अनुपस्थिति पर सवाल, अधीक्षक–विभाग के बीच जिम्मेदारी का टकराव.!

छात्रावासों में बच्चों की अनुपस्थिति पर सवाल, अधीक्षक–विभाग के बीच जिम्मेदारी का टकराव..!
छिंदवाड़ा। जनजातीय कार्य विभाग द्वारा संचालित छात्रावासों में सत्र शुरू होने के बावजूद बच्चों की अनुपस्थिति का मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार स्कूल 17 जून से प्रारंभ हो चुके हैं, लेकिन 1 जुलाई तक जिले के अधिकांश छात्रावासों में छात्र उपस्थित नहीं हो सके हैं। जिला मुख्यालय स्थित छात्रावासों में भी यही स्थिति देखी जा रही है।
छात्रावास अधीक्षकों का कहना है कि जून माह की छात्रवृत्ति (स्टाइपेंड) प्राप्त नहीं होती है, जिसके कारण भोजन व्यवस्था और अन्य मूलभूत सुविधाओं को लेकर कठिनाई उत्पन्न होती है। अधीक्षकों के अनुसार, यदि जून माह की शिष्यावृती प्राप्त होने लगेगी तो हम जून में ही बच्चे को रखने लगेंगे लेकिन शासन के ऐसी कोई नियम नहीं है ना ही शासन के द्वारा जून महीने की शिष्यावृती दी जाती है । , अधीक्षक का कहना है बच्चों को छात्रावास में बुलाकर व्यवस्था करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है।
वहीं इस विषय में जनजातीय कार्य विभाग के क्षेत्र संयोजक का कहना है कि शासन के नियमानुसार जून माह की छात्रवृत्ति जारी नहीं होती है, इसलिए सभी अधीक्षकों को 1 जुलाई के बाद ही बच्चों को छात्रावास में प्रवेश देने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग का कहना है कि आगामी एक-दो दिनों में सभी छात्रावासों में छात्र उपस्थित हो जाएंगे।
इस पूरे मामले में छात्रावास संचालन व्यवस्था और विभागीय समन्वय को लेकर सवाल उठने लगे हैं। एक ओर अधीक्षक संसाधनों की कमी का हवाला दे रहे हैं, तो दूसरी ओर विभागीय अधिकारी नियमों का उल्लेख कर स्थिति को स्पष्ट कर रहे हैं।
स्थानीय स्तर पर यह मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है कि जब शासन के द्वारा शिष्यावृती नहीं दी जाती तो 17 जून से स्कूल क्यों खोल दिए जाते हैं यदि ग्रामीण आदिवासी के बच्चे शहर के छात्रावास में रहते हैं और स्कूल 17 जून से प्रारंभ हो जाते हैं तो बच्चे कहां रहेंगे। व्यवस्था की कमी के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई और आवासीय सुविधा पर असर पड़ रहा है।