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मानसून की बेरुखी से कन्हरगांव जलाशय का लाइव स्टोरेज खाली, शहर की पेयजल व्यवस्था बचाने निगम ने शुरू किए आपात इंतजाम…

मानसून की बेरुखी से कन्हरगांव जलाशय का लाइव स्टोरेज खाली, शहर की पेयजल व्यवस्था बचाने निगम ने शुरू किए आपात इंतजाम
छिंदवाड़ा। मानसून के आगमन में हुई देरी का असर अब शहर की पेयजल व्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। कन्हरगांव जलाशय का लाइव स्टोरेज पूरी तरह समाप्त होने की स्थिति में पहुंचने के बाद नगर पालिक निगम ने शहरवासियों को निर्बाध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाएं शुरू कर दी हैं। जल संकट से निपटने के लिए भरतादेव फिल्टर प्लांट में पॉन्टून (फ्लोटिंग) पंप स्थापित किए जा रहे हैं, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों के बंद पड़े बोरवेलों को भी पुनः चालू कराया गया है।
नगर निगम के अनुसार भरतादेव स्थित 11 एमएलडी और 15 एमएलडी क्षमता वाले जल शोधन संयंत्रों को कन्हरगांव जलाशय से ग्रेविटी पाइपलाइन के माध्यम से कच्चा पानी मिलता है। लेकिन मानसून में विलंब के कारण जलाशय की कुल 26 एमसीएम क्षमता में से 23 एमसीएम लाइव स्टोरेज पूरी तरह समाप्त हो गया, जिससे ग्रेविटी पाइपलाइन में पानी का प्राकृतिक प्रवाह रुक गया और फिल्टर प्लांटों के संचालन पर संकट खड़ा हो गया।
वर्तमान में जलाशय में केवल 3.9 एमसीएम डेड स्टोरेज शेष है। इसी पानी का उपयोग कर जलापूर्ति बनाए रखने के लिए महापौर विक्रम अहके के निर्देश पर विभिन्न क्षमता के पॉन्टून पंप लगाए जा रहे हैं। इन पंपों के माध्यम से डेड स्टोरेज से पानी उठाकर मुख्य पाइपलाइन तक पहुंचाया जाएगा, जिससे जल शोधन संयंत्रों का संचालन निर्बाध रूप से जारी रह सके।
महापौर ने अधिकारियों को कन्हरगांव जलाशय परिसर में 200 केवी क्षमता का नया ट्रांसफार्मर तत्काल स्थापित करने के निर्देश भी दिए हैं, ताकि बिजली संबंधी किसी भी तकनीकी बाधा के कारण जलापूर्ति प्रभावित न हो।
इधर, संभावित पेयजल संकट को देखते हुए नगर निगम ने अपने अधिकार क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में बंद पड़े सभी बोरवेलों की मरम्मत कर उन्हें पुनः चालू कर दिया है। निगम प्रशासन का कहना है कि इन सभी व्यवस्थाओं का उद्देश्य शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में निर्धारित समय पर नियमित एवं सुचारू पेयजल आपूर्ति बनाए रखना है।
नगर निगम ने नागरिकों से भी अपील की है कि वे पानी का उपयोग आवश्यकतानुसार एवं जिम्मेदारी के साथ करें, ताकि उपलब्ध जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन किया जा सके और मानसून के पूरी तरह सक्रिय होने तक पेयजल संकट की स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।