Home CITY NEWS बूंद-बूंद पानी को तरसे ग्रामीण, बंद पड़ी नल-जल योजना पर फूटा जनआक्रोश

बूंद-बूंद पानी को तरसे ग्रामीण, बंद पड़ी नल-जल योजना पर फूटा जनआक्रोश

बूंद-बूंद पानी को तरसे ग्रामीण, बंद पड़ी नल-जल योजना पर फूटा जनआक्रोश
कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, 50 हजार लीटर क्षमता की स्थायी पानी टंकी निर्माण की मांग
छिंदवाड़ा (कढ़ुआ)। सरकार की महत्वाकांक्षी नल-जल योजना जहां ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने का दावा करती है, वहीं जनपद क्षेत्र की ग्राम पंचायत कढ़ुआ में यह योजना लंबे समय से बंद पड़ी हुई है। नतीजतन गांव के सैकड़ों ग्रामीण भीषण पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि लोगों को रोजाना पानी के लिए दूर-दराज के जल स्रोतों का सहारा लेना पड़ रहा है। समस्या से त्रस्त ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।


ग्रामीणों का आरोप है कि नल-जल योजना बंद होने के कारण गांव में पानी की भारी किल्लत बनी हुई है। कई बार शिकायत और मांग के बावजूद संबंधित विभाग एवं ठेकेदारों ने समस्या के समाधान की दिशा में कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया। इससे ग्रामीणों में प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारियों के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है।


ग्रामीणों ने ज्ञापन में उल्लेख किया है कि बरसात का मौसम शुरू हो चुका है और यदि जल्द ही नल-जल योजना को पुनः प्रारंभ नहीं किया गया तो लोग मजबूरी में कुओं, तालाबों और दूषित जल स्रोतों का पानी उपयोग करने को विवश होंगे। इससे डायरिया, टायफाइड, हैजा जैसी जलजनित बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ जाएगा, जो जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
ग्रामीणों ने कलेक्टर से मांग की है कि—
बंद पड़ी नल-जल योजना का तत्काल निरीक्षण कर उसे शीघ्र चालू कराया जाए।
योजना में लापरवाही बरतने वाले ठेकेदारों और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।
भविष्य में पेयजल संकट की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ग्राम पंचायत में कम से कम 50 हजार लीटर क्षमता की स्थायी पानी टंकी का निर्माण कराया जाए।
गांव में नियमित एवं निर्बाध पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए स्थायी कार्ययोजना बनाई जाए।
पेयजल हमारा अधिकार”
ग्रामीणों का कहना है कि स्वच्छ पेयजल प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार है। यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं किया गया तो गांव में जनआंदोलन की स्थिति बन सकती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि उनकी समस्या को प्राथमिकता देते हुए तत्काल प्रभावी कार्रवाई कर राहत प्रदान की जाए।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन ग्रामीणों की इस गंभीर समस्या पर कितनी तेजी से कार्रवाई करता है और कढ़ुआ के लोगों को कब तक पेयजल संकट से राहत मिल पाती है।