अमृत 2.0 योजना में लापरवाही पर बड़ी कार्रवाई, जियो मिलर एंड कंपनी हुई ब्लैकलिस्ट
शहर की पेयजल परियोजना में गंभीर देरी, प्रशासन ने ठेकेदार कंपनी पर की कार्रवाई
छिंदवाड़ा -शहरवासियों को बेहतर और नियमित पेयजल सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी अमृत 2.0 योजना के कार्यों में गंभीर लापरवाही सामने आने पर नगर निगम प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। जलप्रदाय परियोजना का कार्य कर रही जियो मिलर एंड कंपनी प्राइवेट लिमिटेड को ब्लैकलिस्ट करने का निर्णय लिया गया है।
नगर निगम अधिकारियों के अनुसार कंपनी को बारिश शुरू होने से पहले वितरण लाइन से जुड़े लगभग 70 प्रतिशत कार्य पूरे करने थे, लेकिन जून के दूसरे सप्ताह तक कंपनी केवल करीब 30 प्रतिशत कार्य ही पूरा कर सकी। बार-बार निर्देश और चेतावनी दिए जाने के बावजूद कार्य में अपेक्षित प्रगति नहीं होने पर प्रशासन ने सख्त कदम उठाया।
कार्यपालन यंत्री हिमांशु अतुलकर ने बताया कि निरीक्षण के दौरान कंपनी को कई बार कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन स्थिति में कोई विशेष सुधार नहीं हुआ। इसके बाद कार्रवाई हेतु प्रस्ताव भोपाल स्थित संचालनालय को भेजा गया था।
जानकारी के अनुसार अमृत 2.0 योजना के तहत जलप्रदाय कार्य का अनुबंध 9 अक्टूबर 2024 को किया गया था। योजना के अनुसार कार्य पूर्ण करने की अंतिम तिथि 8 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई थी, लेकिन लगभग डेढ़ वर्ष बीत जाने के बाद भी परियोजना का अधिकांश हिस्सा अधूरा है।
नगर निगम का कहना है कि परियोजना में देरी का सीधा असर शहर की पेयजल व्यवस्था पर पड़ रहा है। समय पर कार्य पूरा नहीं होने से नागरिकों को बेहतर जल आपूर्ति उपलब्ध कराने का लक्ष्य प्रभावित हो रहा है।
नगर निगम आयुक्त सी.पी. राय ने कहा कि अमृत 2.0 जैसी जनहितकारी योजना में कार्य की धीमी गति शासन की मंशा और नागरिकों की अपेक्षाओं के विपरीत है। ऐसे में संबंधित कंपनी का पंजीयन जारी रखना उचित नहीं माना गया।
लोक निर्माण विभाग के प्रावधानों के तहत कंपनी के पंजीयन क्रमांक PWD200043195 को एक वर्ष की अवधि अथवा कार्य पूर्ण होने तक, जो भी पहले हो, काली सूची (ब्लैकलिस्ट) में दर्ज करने की कार्रवाई की गई है।
हालांकि प्रशासन ने कंपनी को अपना पक्ष रखने का अवसर भी दिया है। कंपनी इस निर्णय के विरुद्ध आयुक्त, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग, मध्यप्रदेश के समक्ष अभ्यावेदन प्रस्तुत कर सकती है।
गौरतलब है कि अमृत 2.0 योजना का उद्देश्य शहरों में जल आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत बनाना और नागरिकों को नियमित एवं स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना है। परियोजना में हुई देरी को देखते हुए प्रशासन ने इसे जनहित का मामला मानते हुए यह कठोर कदम उठाया है। :::








