समितियों को दरकिनार कर वेयरहाउस में खरीदी, 20-50 किमी दूर केंद्रों से किसानों पर बढ़ा आर्थिक बोझ..!
छिंदवाड़ा/चौरई (पंचायत दिशा समाचार):
मध्य प्रदेश में गेहूं खरीदी को लेकर सरकार की व्यवस्था अब किसानों के लिए राहत नहीं बल्कि परेशानी का कारण बनती जा रही है। जिला प्रशासन द्वारा जारी खरीदी केंद्रों की सूची ने ग्रामीण क्षेत्रों में नाराजगी का माहौल बना दिया है। किसानों का आरोप है कि पारंपरिक समितियों में खरीदी न कर, दूर-दराज के वेयरहाउस में केंद्र बनाए गए हैं, जिससे उनकी लागत बढ़ गई है।
ग्रामीण इलाकों में स्थिति यह है कि कई किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए 20 से 50 किलोमीटर तक का सफर तय करना पड़ रहा है। ऐसे में परिवहन खर्च ही 100 से 200 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच रहा है। किसानों का कहना है कि जब इतनी लागत सिर्फ ले जाने में ही लग जाएगी, तो समर्थन मूल्य का लाभ उन्हें कैसे मिलेगा।
किसानों की पीड़ा:
स्थानीय किसानों का कहना है कि पहले जहां नजदीकी समितियों में आसानी से खरीदी हो जाती थी, वहीं अब उन्हें लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है। छोटे और मध्यम किसान, जिनके पास सीमित संसाधन हैं, उनके लिए यह व्यवस्था किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है।
नीतियों पर उठ रहे सवाल:
किसानों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर सरकार समितियों में खरीदी क्यों नहीं कर रही। क्या यह व्यवस्थागत कमी है या फिर कोई ऐसी नीति, जो किसानों को खुले बाजार की ओर धकेल रही है?
प्रशासन की चुप्पी:
इस पूरे मामले में जिला प्रशासन की ओर से अब तक कोई स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है। खरीदी केंद्रों के चयन को लेकर पारदर्शिता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
किसानों की मांग:
किसानों ने मांग की है कि
खरीदी केंद्रों को नजदीकी समितियों में ही संचालित किया जाए
परिवहन दूरी कम की जाए
अतिरिक्त खर्च की भरपाई के लिए अलग से सहायता दी जाए
निष्कर्ष:
अगर समय रहते इस व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया, तो इसका सीधा असर किसानों की आय पर पड़ेगा और सरकार की खरीदी नीति पर विश्वास भी कमजोर होगा। फिलहाल किसान खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं और जल्द समाधान की उम्मीद लगाए बैठे हैं।







