छिंदवाड़ा RTO में “अनुज राज”! बिना रिश्वत फाइल नहीं हिलती, एजेंटों का सनसनीखेज आरोप.!
प्रभारी आरटीओ अनुराग शुक्ला पर सवाल, बाहरी लोगों के हवाले दफ्तर का काम — लाइसेंस, रजिस्ट्रेशन और ट्रांसफर की सैकड़ों फाइलें अटकीं..?
छिंदवाड़ा (पंचायत दिशा समाचार)।
छिंदवाड़ा के आरटीओ कार्यालय में इन दिनों अफसरों की नहीं, बल्कि कथित तौर पर “वसूलीबाजों” की हुकूमत चलने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। एजेंटों और आवेदकों का दावा है कि बिना पैसे दिए कोई भी फाइल आगे नहीं बढ़ती, जिससे आम जनता बुरी तरह परेशान है।
सूत्रों के मुताबिक, आरटीओ कार्यालय में अनुज, हरि, कृष्णा, कमलेश, मुकेश, संतोष और अरविंद जैसे बाहरी युवकों का इतना दबदबा है कि उनके बिना कोई भी फाइल इधर से उधर नहीं हो सकती। आरोप है कि ये लोग आवेदकों से ऑनलाइन फीस से 5 गुना तक अधिक वसूली करते हैं और हर माह लाखों रुपये का लेन-देन करते हैं।
“बिना पैसे नहीं चलता सिस्टम”
एजेंटों का आरोप है कि न्यू रजिस्ट्रेशन, गाड़ी ट्रांसफर और ड्राइविंग लाइसेंस जैसे जरूरी काम सैकड़ों की संख्या में लंबित पड़े हैं। ये सभी सेवाएं लोक सेवा गारंटी के तहत आती हैं, लेकिन रिश्वत नहीं मिलने पर फाइलें आगे नहीं बढ़ाई जा रहीं।
प्रभारी आरटीओ पर भी सवाल.!
प्रभारी आरटीओ अनुराग शुक्ला पर भी एजेंटों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि वे सप्ताह में केवल 1-2 दिन ही कार्यालय आते हैं और कुछ घंटों में ही काम निपटाकर चले जाते हैं। ऐसे में पूरे कार्यालय की व्यवस्था कथित रूप से बाहरी लोगों के भरोसे चल रही है।
बाहरी लोगों को क्यों मिली एंट्री?
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब अनुज और उसके साथी आरटीओ के नियमित कर्मचारी नहीं हैं, तो उन्हें दफ्तर में प्रवेश और फाइलों तक पहुंच कैसे दी गई?
बताया जा रहा है कि अनुज, जो आउटसोर्स पर सिक्योरिटी के लिए नियुक्त है, उसे स्थापना शाखा जैसे महत्वपूर्ण विभाग का काम सौंप दिया गया है।
“पहले अनुज-हरि से मिलो, फिर बाबू से”
दफ्तर में आने वाले आवेदकों का कहना है कि उन्हें सीधे कर्मचारियों से नहीं, बल्कि पहले अनुज और हरि से संपर्क करने के लिए कहा जाता है। यही लोग पैसे की पुष्टि करते हैं, उसके बाद ही काम आगे बढ़ता है।
जनता त्रस्त, जिम्मेदार मौन
आरटीओ की इस कथित भ्रष्ट कार्यप्रणाली से आम जनता के जरूरी काम अटके हुए हैं। लोग कई-कई दिनों तक चक्कर काटने को मजबूर हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों पर इसका कोई असर नहीं दिख रहा।
मुख्यमंत्री को भेजा गया ज्ञापन
एजेंटों ने इस पूरे मामले की शिकायत मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर की है और मांग की है कि आरटीओ कार्यालय में चल रही इस कथित वसूली व्यवस्था की निष्पक्ष जांच कर सख्त कार्रवाई की जाए।
(नोट: यह खबर एजेंटों और संबंधित लोगों द्वारा लगाए गए आरोपों पर आधारित है। प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया आना शेष है।)







