विधायक सोहन बाल्मीकि के समर्थन में उतरे विधायक, एफआईआर निरस्त करने की मांग
कार्रवाई नहीं होने पर 28 अक्टूबर से चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी, एसडीएम की भूमिका की जांच की भी उठी मांग
छिंदवाड़ा/परासिया। परासिया क्षेत्र के चानाबेटा में दशहरा आयोजन को लेकर उपजे विवाद और विधायक सोहन बाल्मीकि के खिलाफ दर्ज एफआईआर का मामला अब राजनीतिक तूल पकड़ता नजर आ रहा है। इस मामले में मीडिया से चर्चा करते हुए एक नेता ने एफआईआर दर्ज किए जाने पर विरोध जताया और शासन-प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई करने की मांग की।
मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि चानाबेटा में हर वर्ष विधायक सोहन बाल्मीकि के नेतृत्व में बड़े स्तर पर दशहरा उत्सव का आयोजन किया जाता है। उनके अनुसार, इस वर्ष भी आयोजन की तैयारियां की गई थीं, लेकिन कुछ असामाजिक तत्वों और भाजपा के कुछ नेताओं द्वारा कार्यक्रम को प्रभावित करने का प्रयास किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता के दबाव में आकर विधायक सोहन बाल्मीकि के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
इस कार्रवाई के विरोध में विभिन्न विधायकों द्वारा एकजुट होकर पुलिस अधीक्षक (एसपी) को लिखित आवेदन सौंपे जाने की बात भी कही गई। आवेदन के माध्यम से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, विधायक के खिलाफ दर्ज एफआईआर को निरस्त करने और विवाद के दौरान कथित रूप से अवैध तरीके से वहां पहुंचे लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की गई है।
नेता ने कहा कि कानून सभी के लिए समान होना चाहिए और किसी भी जनप्रतिनिधि के खिलाफ कार्रवाई तथ्यों एवं निष्पक्ष जांच के आधार पर होनी चाहिए। उन्होंने प्रशासन से मामले की गंभीरता को देखते हुए उचित कदम उठाने की अपील की।
28 तारीख से आंदोलन की चेतावनी
मीडिया से चर्चा में उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि मामले में उचित कार्रवाई नहीं की जाती है, तो विधायक सोहन बाल्मीकि के समर्थन में सामूहिक आंदोलन शुरू किया जाएगा। उनके मुताबिक, 28 तारीख से परासिया सहित नरसिंहपुर, पांढुर्णा, चौरई और सौंसर तक चरणबद्ध तरीके से धरना-प्रदर्शन किए जाने की रणनीति है।
उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर इस मामले को सड़क से लेकर न्यायालय, विधानसभा और भोपाल तक उठाया जाएगा। साथ ही मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के समक्ष भी शिकायत दर्ज कराकर न्याय की मांग की जाएगी।
एसडीएम की भूमिका पर भी उठाए सवाल
नेता ने इस पूरे विवाद में संबंधित अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारी ने भाजपा के साथ मिलकर दशहरा कार्यक्रम को प्रभावित करने में सहयोग किया। उन्होंने कहा कि इस संबंध में भी उच्च अधिकारियों से शिकायत की जाएगी और मामले की जांच की मांग उठाई जाएगी।
फिलहाल, इस मामले में लगाए गए आरोपों और एफआईआर को लेकर संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आना तथा जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे। अब देखना होगा कि पुलिस और प्रशासन इस विवाद पर क्या कार्रवाई करते हैं और प्रस्तावित आंदोलन को लेकर आगे क्या स्थिति बनती है।
मुख्य मांगें: विधायक सोहन बाल्मीकि के खिलाफ दर्ज एफआईआर निरस्त करने, पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, विवाद में शामिल बताए जा रहे लोगों पर कार्रवाई करने और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच कराने की मांग की गई है।








