जनविश्वास अभियान में निरीक्षण और नोटिस तो खूब, क्या सच में बढ़ा ग्रामीणों का विश्वास?
छठवें शुक्रवार को तराई पहुंचा पूरा प्रशासनिक अमला, स्कूल-आंगनबाड़ी से छात्रावास और अस्पताल तक जांच; शिविर में शिकायतों की भरमार ने व्यवस्था पर खड़े किए सवाल
छिंदवाड़ा/जुन्नारदेव, 18 सितंबर। मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान का उद्देश्य सरकारी सेवाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जनोन्मुखी बनाना है। लेकिन अभियान के छठवें शुक्रवार को जुन्नारदेव के तराई क्षेत्र में सामने आई तस्वीर एक बड़ा सवाल छोड़ गई—क्या जनविश्वास अभियान से वास्तव में ग्रामीणों के काम हो रहे हैं या फिलहाल अभियान निरीक्षण, शिकायतों की सुनवाई और कारण बताओ नोटिस तक ही सीमित है?

कलेक्टर हरेंद्र नारायन सहित जिला प्रशासन का पूरा अमला तराई और आसपास के गांवों में पहुंचा। आंगनबाड़ी, स्कूल, आदिवासी छात्रावास और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण किया गया। इसके बाद जनसमस्या निवारण शिविर में ग्रामीणों की शिकायतें सुनी गईं। कई मामलों में अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए गए और कुछ मामलों में कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश भी दिए गए।

स्कूल में बच्चों का लर्निंग लेवल परखा, सामने आई तस्वीर
भाखरा की प्राथमिक शाला में कलेक्टर ने चौथी और पांचवीं कक्षा के विद्यार्थियों से पर्यावरण एवं अंग्रेजी विषय से सवाल किए। कुछ विद्यार्थियों द्वारा संतोषजनक जवाब नहीं दिए जाने पर शिक्षकों को अध्ययन-अध्यापन की गुणवत्ता सुधारने के निर्देश दिए गए।
अब सवाल यह है कि जब प्रशासनिक निरीक्षण में ही बच्चों के शैक्षणिक स्तर में कमी सामने आ रही है, तो नियमित रूप से स्कूलों की मॉनिटरिंग किस स्तर पर हो रही थी? क्या केवल निरीक्षण के दिन व्यवस्था सुधारने के निर्देश से बच्चों की पढ़ाई का स्तर बदल जाएगा, या इसकी नियमित समीक्षा भी होगी?

छात्रावास में सुविधाओं की जांच, लेकिन असली परीक्षा व्यवस्था की
गोप के शासकीय जूनियर आदिवासी बालक छात्रावास में उपस्थिति पंजी, भोजन, पेयजल, साफ-सफाई सहित मूलभूत सुविधाओं की जानकारी ली गई। निरीक्षण में व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया।
लेकिन जनजातीय छात्रावासों को लेकर जिले में पहले भी व्यवस्थाओं से जुड़े सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि क्या निरीक्षण के बाद व्यवस्था वास्तव में बदलेगी और क्या इसकी अगली समीक्षा भी होगी?

अस्पताल में दवाओं से लेकर एंटी स्नेक वेनम तक जांच
गोपतराई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में ओपीडी, दवा वितरण, टीकाकरण, साफ-सफाई और स्टोर रूम का निरीक्षण किया गया। एंटी स्नेक वेनम सहित जरूरी दवाओं की उपलब्धता भी देखी गई।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक परीक्षा उस समय होती है जब मरीज को तत्काल इलाज की जरूरत होती है। इसलिए सवाल यह भी है कि निरीक्षण के बाद स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी कौन करेगा?

शिविर में शिकायतें ही शिकायतें, चार मामलों में नोटिस के निर्देश
तराई के जनसमस्या निवारण शिविर में ग्रामीणों ने बड़ी संख्या में समस्याएं और मांगें रखीं। शिकायतों की समीक्षा के दौरान कई मामलों में अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
जन्म प्रमाण-पत्र से जुड़ी प्रक्रिया में विसंगति के मामले में ग्राम पंचायत खुमकाल के सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जुन्नारदेव के मेडिकल ऑफिसर की उपस्थिति एवं व्यवहार से जुड़ी शिकायत पर विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
प्रधानमंत्री आवास योजना के मामले में ब्लॉक कोऑर्डिनेटर की भूमिका संतोषजनक नहीं पाए जाने पर कारण बताओ नोटिस के निर्देश दिए गए। वहीं एक प्रकरण को बिना तथ्यात्मक जांच के दूसरे विभाग में भेजे जाने के मामले में जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के महाप्रबंधक को भी नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए।
नोटिस से आगे कब पहुंचेगा जनविश्वास?
यही इस पूरे अभियान का सबसे बड़ा सवाल बनकर सामने आता है। शिकायत पर सुनवाई, निरीक्षण और नोटिस प्रशासनिक कार्रवाई का हिस्सा हैं, लेकिन ग्रामीणों के लिए असली जनविश्वास तभी बनेगा जब शिकायत का अंतिम समाधान जमीन पर दिखाई देगा।
जिस ग्रामीण ने आवास मांगा है, उसे आवास मिले। जिस परिवार ने प्रमाण-पत्र की समस्या बताई है, उसका काम समय पर हो। जिस मरीज को स्वास्थ्य सुविधा चाहिए, उसे अस्पताल में समय पर इलाज और दवा मिले। जिस बच्चे को बेहतर शिक्षा चाहिए, उसका लर्निंग लेवल वास्तव में सुधरे।
अब अगली समीक्षा पर रहेगी नजर
मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान के तहत प्रशासन ने कार्रवाई के निर्देश तो दिए हैं, लेकिन इन निर्देशों का कितना पालन हुआ, कितने मामलों का अंतिम निराकरण हुआ और कितने ग्रामीणों को वास्तव में राहत मिली—इसका आंकड़ा ही अभियान की वास्तविक सफलता बताएगा।
इसलिए अब सवाल सिर्फ यह नहीं कि जनविश्वास अभियान में क्या जांच हुई?
सवाल यह है कि जांच के बाद क्या बदला?
और सबसे बड़ा सवाल—क्या ग्रामीणों के काम सच में हो रहे हैं या जनविश्वास अभियान भी निरीक्षण और नोटिस की औपचारिकता बनकर रह जाएगा?








