सांकेतिक चित्र
दस साल से बिना गैस कनेक्शन छात्रावास! बिलों में चलता रहा ‘गैस का खेल’
भिंमालगोंदी सीनियर बालक छात्रावास में गैस खरीदी के नाम पर भुगतान पर उठे गंभीर सवाल, पूर्व अधीक्षक की भूमिका जांच के घेरे में
विशेष रिपोर्ट – ठा.रामकुमार राजपूत
छिंदवाड़ा/बिछुआ। जनजातीय कार्य विभाग द्वारा संचालित बिछुआ विकासखंड के भिंमालगोंदी सीनियर बालक छात्रावास में गैस कनेक्शन और गैस खरीदी के नाम पर वर्षों से चल रही कथित अनियमितताओं ने विभागीय व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि छात्रावास करीब 10 वर्षों से वैध गैस कनेक्शन के बिना संचालित होता रहा, जबकि गैस रिफिलिंग एवं खरीदी के नाम पर शासकीय राशि का भुगतान किए जाने के मामले सामने आए हैं।
सबसे गंभीर सवाल यह है कि यदि छात्रावास में वैध गैस कनेक्शन ही नहीं था, तो इतने वर्षों तक गैस सिलेंडर, रिफिलिंग और संबंधित खर्च के बिल किस आधार पर प्रस्तुत और स्वीकृत होते रहे? इन भुगतानों की जांच अब विभागीय स्तर पर आवश्यक हो गई है।
पूर्व अधीक्षक पर गंभीर आरोप, दस्तावेजों की जांच जरूरी
मामले में तत्कालीन अधीक्षक शांताराम ठाकरे की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि उनके कार्यकाल में गैस कनेक्शन के अभाव के बावजूद गैस से संबंधित भुगतान किए जाते रहे। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि दस्तावेजी जांच के बाद ही हो सकेगी। ऐसे में संबंधित अवधि के बिल, वाउचर, कैशबुक, स्टॉक रजिस्टर, गैस एजेंसी के रिकॉर्ड और बैंक भुगतान की जांच महत्वपूर्ण होगी।
वर्तमान अधीक्षक ने भी उठाए सवाल..!
वर्तमान अधीक्षक का कहना है कि उन्हें पूर्व अधीक्षक द्वारा गैस कनेक्शन से संबंधित कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराया गया। उनका कहना है कि वर्तमान में छात्रावास संचालन के लिए उन्हें मजबूरी में बाहर से गैस की व्यवस्था करनी पड़ रही है। यदि यह स्थिति सही है तो यह सवाल और गंभीर हो जाता है कि आखिर इतने वर्षों तक छात्रावास में गैस व्यवस्था किस आधार पर संचालित होती रही।
‘ब्लैक’ में गैस खरीदने का दावा, जांच से खुलेगा सच..
वर्तमान व्यवस्था को लेकर ब्लैक मार्केट से गैस खरीदने का दावा भी सामने आया है। यदि शासकीय छात्रावास के लिए वास्तव में अनधिकृत तरीके से गैस खरीदी गई, तो यह सुरक्षा और वित्तीय दोनों दृष्टि से गंभीर मामला हो सकता है। इसकी पुष्टि के लिए विभाग को गैस सिलेंडरों की उपलब्धता, वैध कनेक्शन, उपभोक्ता संख्या, आपूर्ति रजिस्टर और भुगतान रिकॉर्ड का भौतिक सत्यापन कराना चाहिए।
बाबुओं की भूमिका भी जांच के दायरे में
सवाल सिर्फ छात्रावास अधीक्षक तक सीमित नहीं है। यदि गैस खरीदी के बिल विभागीय कार्यालय में प्रस्तुत हुए और उनका भुगतान हुआ, तो बिलों की जांच, सत्यापन और भुगतान प्रक्रिया में शामिल कर्मचारियों एवं अधिकारियों की भूमिका भी जांच का विषय बनती है। वर्षों तक भुगतान हुए हैं तो यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि बिल किसने तैयार किए, किसने सत्यापित किए, किस अधिकारी ने स्वीकृत किए और भुगतान किस आधार पर किया गया।
एक छात्रावास नहीं, पूरे जिले के हॉस्टलों की हो गैस व्यवस्था की जांच
भिंमालगोंदी के मामले को देखते हुए अब जनजातीय कार्य विभाग के अंतर्गत संचालित सभी छात्रावासों की गैस व्यवस्था की जांच की मांग उठ रही है। प्रत्येक छात्रावास में वैध गैस कनेक्शन, कनेक्शन नंबर, सिलेंडरों की संख्या, रिफिलिंग की तारीख, एजेंसी रिकॉर्ड और भुगतान किए गए बिलों का मिलान कराया जाना चाहिए।
हादसा हुआ तो जिम्मेदार कौन?
छात्रावास में गैस व्यवस्था यदि नियमों के विपरीत संचालित हो रही है तो यह केवल वित्तीय अनियमितता का मामला नहीं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है। ऐसे में विभाग को तत्काल सुरक्षा ऑडिट और भौतिक सत्यापन कराना चाहिए। भविष्य में किसी दुर्घटना की स्थिति में जिम्मेदारी तय करने के लिए भी विभागीय रिकॉर्ड में स्पष्ट जवाबदेही निर्धारित होना जरूरी है।
विभाग से उठते ये बड़े सवाल
बिना वैध गैस कनेक्शन के वर्षों तक छात्रावास कैसे संचालित हुआ?
गैस के नाम पर प्रस्तुत बिलों का सत्यापन किसने किया?
भुगतान किस अधिकारी की स्वीकृति से हुआ?
संबंधित अवधि के गैस कनेक्शन एवं एजेंसी रिकॉर्ड क्यों नहीं जांचे गए?
पूर्व अधीक्षक से गैस कनेक्शन के दस्तावेज क्यों नहीं लिए गए?
यदि गैस कनेक्शन नहीं था तो गैस खरीदी के बिल किस आधार पर पास हुए?
भुगतान प्रक्रिया में शामिल बाबुओं और अधिकारियों की भूमिका की जांच कब होगी?
क्या विभाग जिले के सभी छात्रावासों की गैस व्यवस्था का भौतिक सत्यापन कराएगा?
मांग: पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कर संबंधित वर्षों के बिल-वाउचर और गैस एजेंसी रिकॉर्ड का मिलान कराया जाए। यदि जांच में फर्जी बिल, गलत भुगतान या शासकीय राशि के दुरुपयोग की पुष्टि होती है तो दोषी अधीक्षक, बिल सत्यापन/भुगतान प्रक्रिया में शामिल कर्मचारियों तथा संबंधित अधिकारियों पर नियमानुसार कार्रवाई और राशि की वसूली की जाए।
नोट: उपरोक्त आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बिना नहीं की गई है। संबंधित पूर्व अधीक्षक, विभागीय अधिकारियों और बिल भुगतान प्रक्रिया से जुड़े कर्मचारियों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।








