विशेष /रिपोर्ट रामकुमार राजपूत छिंदवाड़ा
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अमृत 2.0 योजना के कामों की गुणवत्ता पर उठे सवाल
नगर पालिका परिषद चौरई के पार्षद ने ठेकेदार कंपनी के कार्यों की जांच और भुगतान रोकने की मांग की
छिंदवाड़ा/चौरई। नगर पालिका परिषद चौरई में अमृत 2.0 योजना के तहत कराए जा रहे पेयजल संबंधी कार्यों की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। नगर पालिका के वार्ड क्रमांक 06 के पार्षद एवं अपील समिति सदस्य महेंद्र वर्मा (निवकी) ने मुख्य नगर पालिका अधिकारी को पत्र सौंपकर वनांचल कंस्ट्रक्शन कंपनी बिछुआ द्वारा किए जा रहे कार्यों की गुणवत्ता की जांच कराने तथा भुगतान पर रोक लगाने की मांग की है।
पार्षद ने शिकायत में आरोप लगाया है कि अमृत 2.0 योजना का कार्य संबंधित ठेकेदार द्वारा 9 अक्टूबर 2024 से कराया जा रहा है, लेकिन करीब 22 माह बीतने के बावजूद अब तक लगभग 50 प्रतिशत ही कार्य पूरा हुआ है। शिकायत के अनुसार न तो पेयजल टंकी का निर्माण पूर्ण हुआ है और न ही पेयजल वितरण पाइप लाइन का काम पूरा किया गया है।

15 अगस्त तक पूरा होना था पाइप लाइन का काम
शिकायत में बताया गया कि 4 जुलाई 2026 को नगर पालिका परिषद चौरई के उपयंत्री, पीडीएमसी, आरआई एवं एमपीईबी की मौजूदगी में ठेकेदार को कार्य पूर्ण करने के लिए वर्क प्लान तैयार किया गया था। इसमें पेयजल वितरण पाइप लाइन का कार्य 15 अगस्त 2026 तक पूर्ण किया जाना था, लेकिन निर्धारित समय सीमा बीतने के बाद भी कार्य पूरा नहीं हुआ।
पाइप लाइन बिछाने के तरीके पर भी सवाल
पार्षद ने वार्ड क्रमांक 06 के अमरवाड़ा रोड स्थित कृषि उपज मंडी के पास डाली गई पेयजल पाइप लाइन को लेकर भी गंभीर आपत्ति जताई है। शिकायत के मुताबिक पाइप लाइन को जमीन की सतह से करीब एक मीटर नीचे गाड़कर डालने का नियम है, लेकिन मौके पर पाइप लाइन को ऊपर-ऊपर डालने का आरोप लगाया गया है।
पार्षद ने आशंका जताई कि कृषि उपज मंडी में भारी लोडेड वाहनों की आवाजाही से पाइप लाइन क्षतिग्रस्त हो सकती है और भविष्य में वार्डवासियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
22 माह से टैंकरों के भरोसे पेयजल आपूर्ति
शिकायत में यह भी कहा गया है कि अमरवाड़ा रोड क्षेत्र के रहवासियों को पिछले करीब 22 माह से टैंकरों के माध्यम से पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे निकाय निधि पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ने का आरोप लगाया गया है।
पार्षद महेंद्र वर्मा ने सीएमओ से मांग की है कि अमृत 2.0 योजना के तहत किए जा रहे सभी कार्यों की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराई जाए। साथ ही कार्य की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं पाए जाने पर संबंधित ठेकेदार के भुगतान पर रोक लगाने की कार्रवाई की जाए।
अब देखना यह होगा कि शिकायत के बाद नगर पालिका प्रशासन निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की जांच कराता है या नहीं।








