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शासन के गौरव दिवस से दूरी या जिम्मेदारियों से बेरुखी? नगर निगम कमिश्नर की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल

शासन के गौरव दिवस से दूरी या जिम्मेदारियों से बेरुखी? नगर निगम कमिश्नर की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल

महापौर को मिलने का समय नहीं मिलने का आरोप, महत्वपूर्ण आयोजनों से अनुपस्थिति पर बढ़ी नाराजगी

छिंदवाड़ा। मध्य प्रदेश शासन की महत्वपूर्ण योजनाओं और गौरव दिवस जैसे आयोजनों को लेकर छिंदवाड़ा नगर निगम की कार्यप्रणाली अब सवालों के घेरे में आ गई है। नगर निगम कमिश्नर की लगातार अनुपस्थिति और जनप्रतिनिधियों के साथ संवाद को लेकर सामने आ रही शिकायतों ने निगम प्रशासन की प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

आरोप है कि नगर निगम कमिश्नर शासन से जुड़े महत्वपूर्ण गौरव दिवस कार्यक्रमों में लगातार नदारत रहे हैं। सवाल यह है कि जब मध्य प्रदेश शासन स्वयं ऐसे आयोजनों को महत्व देता है और स्थानीय स्तर पर इनके आयोजन में नगर निगम की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है, तब आखिर निगम के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी की अनुपस्थिति का कारण क्या है?

मामला यहीं तक सीमित नहीं है। महापौर की ओर से भी नाराजगी सामने आने की बात कही जा रही है। आरोप है कि महापौर द्वारा नगर निगम कमिश्नर से मुलाकात के लिए समय मांगे जाने के बावजूद उन्हें अपेक्षित समय नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में शहर के निर्वाचित जनप्रतिनिधि और नगर निगम के प्रशासनिक मुखिया के बीच संवाद की स्थिति को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

जनप्रतिनिधि इंतजार करें और अधिकारी कार्यक्रमों से दूर रहें?

नगर निगम जनता से सीधे जुड़े शहर के विकास, स्वच्छता, पेयजल, सड़क, प्रकाश व्यवस्था और शासन की योजनाओं के क्रियान्वयन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभालता है। ऐसे में यदि शासन के प्रमुख आयोजनों में जिम्मेदार अधिकारी की अनुपस्थिति और जनप्रतिनिधियों के साथ संवाद की कमी के आरोप सामने आते हैं, तो स्वाभाविक रूप से सवाल उठेंगे कि आखिर नगर निगम प्रशासन किस प्राथमिकता के आधार पर काम कर रहा है?

शहरवासियों के बीच भी यह चर्चा का विषय बनता जा रहा है कि क्या मध्य प्रदेश शासन के महत्वपूर्ण कार्यक्रमों को नगर निगम स्तर पर अपेक्षित गंभीरता से लिया जा रहा है, या फिर जिम्मेदार अधिकारी अपनी अलग कार्यशैली के अनुसार प्रशासन चला रहे हैं?

सबसे बड़ा सवाल—जवाबदेही किसकी?

गौरव दिवस केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि स्थानीय इतिहास, उपलब्धियों और नागरिक सहभागिता से जुड़े आयोजन हैं। ऐसे महत्वपूर्ण अवसरों से लगातार दूरी के आरोपों ने नगर निगम कमिश्नर की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिया है।

क्या शासन के महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में उपस्थिति अधिकारियों की प्राथमिक जिम्मेदारी नहीं है?
क्या शहर के प्रथम नागरिक महापौर को मुलाकात के लिए समय न मिलना सामान्य प्रशासनिक स्थिति मानी जा सकती है?
और यदि जनप्रतिनिधि तथा प्रशासनिक अधिकारी के बीच संवाद ही कमजोर हो जाए, तो शहर के विकास कार्यों की जवाबदेही कौन तय करेगा?

इन सवालों का जवाब अब नगर निगम प्रशासन को देना होगा।

हालांकि, नगर निगम कमिश्नर की ओर से इन आरोपों और सवालों पर उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका है। पंचायत दिशा समाचार निष्पक्ष पत्रकारिता के सिद्धांतों के तहत कमिश्नर का पक्ष मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित करेगा।